
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)29 मई।पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत सिन्हा गांव स्थित गंगा घाट पर करीब 15 वर्ष पूर्व 44 लाख रुपये की लागत से निर्मित विद्युत शवदाह गृह आज बदहाली का शिकार होकर खंडहर में तब्दील हो गया है। जिले का पहला विद्युत शवदाह गृह होने के बावजूद यह परियोजना शुरू होने से पहले ही उपेक्षा की भेंट चढ़ गई।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2010 में बड़ी उम्मीदों के साथ इस शवदाह गृह का निर्माण कराया गया था। योजना का उद्देश्य लकड़ी की खपत कम करना, पर्यावरण प्रदूषण को रोकना तथा लोगों को आधुनिक शवदाह सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन रख-रखाव के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह भवन आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।ग्रामीण उमेश सिंह ने बताया कि शवदाह गृह की दीवारें टूट रही हैं, विद्युत उपकरण पूरी तरह खराब हो चुके हैं तथा परिसर में झाड़ियां और जंगली पौधे उग आए हैं। वर्षों से किसी प्रकार का रखरखाव नहीं होने के कारण भवन की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शवदाह गृह के संचालन में सबसे बड़ी बाधा सड़क और बिजली की व्यवस्था रही। सिन्हा बाजार से गंगा घाट तक जाने वाली सड़क अब तक पक्की नहीं बन सकी है, जबकि भवन तक नियमित बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी नहीं की गई। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की यह महत्वाकांक्षी योजना उपयोग से पहले ही बंद होकर रह गई।लक्ष्मीपुर निवासी विक्रम सिंह ने बताया कि शवदाह गृह बंद रहने के कारण ग्रामीणों को आज भी पारंपरिक लकड़ी की चिता पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से मांग की है कि शवदाह गृह की तत्काल मरम्मत कर बिजली, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वर्षों से बंद पड़ी इस सरकारी संपत्ति का उपयोग हो सके और जनता को इसका लाभ मिल सके।
