साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डा जगदीश पाण्डेय की जयंती पर हुआ पुस्तक का लोकार्पण, हुई कवि-गोष्ठी।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)17 जुलाई। गीति-धारा के सुचर्चित कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय के एक ही लम्बे गीत की पुस्तक ‘हे राम! तुम्हें आना होगा’ भगवान श्री राम के आह्वान के माध्यम से समाज की सघन पीड़ा और मानव-जगत की दुर्दशा की मार्मिक अभिव्यक्ति है। २०० अंतराओं में ६६ पृष्ठों के इस एक गीत में मानव-मन के प्रायः सभी भावों की भी अभिव्यक्ति हुई है। श्री पाण्डेय छंद-सिद्ध और काव्य-प्रतिभा से संपन्न कोकिल-कंठ सुकवि हैं। अस्तु इनकी रचनाओं में गेयता और माधुर्य भी अपने सुंदरतम रूप में लक्षित है।
यह बातें शुक्रवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डा जगदीश पाण्डेय की जयंती पर आयोजित, श्री पाण्डेय की पुस्तक ‘हे राम ! तुम्हें आना होगा!” के लोकार्पण-समारोह और कवि-गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। अपने पूर्व अध्यक्ष को स्मरण करते हुए डा सुलभ ने कहा कि, डा जगदीश पाण्डेय, साहित्य समेत सभी सारस्वत सरोकारों से गहरे जुड़े हुए एक कोमल भावनाओं से युक्त आदरणीय व्यक्तित्व थे। वे साहित्य, कला और संस्कृति को समाज के लिए सर्वाधिक मूल्यवान मानते हुए, सदैव ही उनके पक्ष में सदल-बल खड़े रहे। उन्होंने उदारता-पूर्वक साहित्यिक-कार्यों और साहित्यकारों की सहायता में योगदान दिया। मृत-प्राय साहित्य-सम्मेलन को उन्होंने संजीवनी दी। वे साहित्य की परोक्ष सेवा के लिए सदैव स्मरण किए जाते रहेंगे।
समारोह का उद्घाटन करते हुए संस्कृत शिक्षा बोर्ड, बिहार के अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने कहा कि कवि श्री ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने भाव पूर्ण इस गीति-रचना के माध्यम से सरस्वती की बड़ी सेवा की है और प्रभु श्री राम को विश्वास से स्मरण किया है। साहित्य सम्मेलन साहित्यकारों का मंदिर है, इसकी ऊन्नति में सरकार अपना सहयोग करेगी।
अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि लोकार्पित पुस्तक के कवि श्री पाण्डेय दूरदर्शन, आकाशवाणी और मंच समेत अनेक सारस्वत विधाओं से जुड़े हुए हैं, किंतु ये मूल रूप से गीत के कवि हैं। इस पुस्तक के माध्यम से कवि ने प्रभु श्रीराम का आह्वान इस तरह किया है कि, संसार की वर्तमान दुर्दशा से रक्षा के लिए श्री राम को आना ही होगा।
वरिष्ठ साहित्यकार बच्चा ठाकुर, डा शशि भूषण सिंह, डा रत्नेश्वर सिंह, पं उमेश झा, डा अशोक प्रियदर्शी, डा पुष्पा जमुआर, डा मनोज गोवर्धनपुरी, प्रो सुखित वर्मा, डा अशोक प्रियदर्शी ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष को श्रद्धांजलि और कवि ब्रह्मानन्द को बधाइयाँ दीं।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन का आरम्भ जय प्रकाश पुजारी की वाणी-वंदना से हुआ। लोकार्पित पुस्तक के कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने शुभेच्छा प्रदान करने वाले साहित्यकारों के प्रति कृतज्ञता-ज्ञापित की तथा अपनी पुस्तक से प्रमुख छंदों का सस्वर पाठ भी किया। वरिष्ठ कवि प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, डा समरेंद्र नारायण आर्य, श्याम बिहारी प्रभाकर, पं गणेश झा, ईं अशोक कुमार, सिद्धेश्वर, सुनील कुमार, डा प्रतिभा रानी, डा शालिनी पाण्डेय, सागरिका राय, आशा रघुदेव, शमा कौसर ‘शमा’, नीता सहाय, सदानन्द प्रसाद, नरेंद्र कुमार, इन्दुभूषण सहाय, भावनाथ झा, सुजाता मिश्र, सुनील कुमार ‘मलंग’, चित्तरंजन लाल भारती, सरिता कुमारी, राजदेव सिंह, कुमार राकेश ऋतुराज, देशेश जलज, नन्दन कुमार आदि कवियों ने अपनी रचनाओं से समारोह में रस घोले। मंच का युवा कवि सूर्य प्रकाश उपाध्याय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
व्यंग्य के वरिष्ठ साहित्यकार ईं बाँके बिहारी साव, प्रवीर कुमार पंकज, राजेन्द्र तिवारी, सच्चिदानन्द शर्मा, कुमार प्रकाश ऋतुराज आदि बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
