डॉ.रामजन्म मिश्र स्वस्ति ग्रंथ लोकार्पित।
RKTV NEWS/वाराणसी (उत्तर प्रदेश)22 फ़रवरी।विश्व भोजपुरी संघ के तत्वावधान में कृष्णदेव नगर कालोनी, सराय नंदन वाराणसी स्थित एक सभागार में 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर सारस्वत साधना के सात्विक साधक डॉ.रामजन्म मिश्र स्वस्ति ग्रंथ का लोकार्पण करते उनके अस्सी वर्ष के आयु में भी सक्रिय रहते हुए निरंतर साहित्यिक साधना, विपुल सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों को नमन किया गया । अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्व भोजपुरी संघ के महासचिव डॉ.अपूर्व नारायण तिवारी ‘बनारसी बाबू’ ने कहा कि लोकभाषा काशिका वास्तव में संसार की सबसे प्राचीन मातृभाषा है । जिसे संवैधानिक सरंक्षण की आज दरकार है ।ये हमारे धर्म, कर्म, संस्कार और पसीने की भाषा है । लोकभाषा स्वरूप में महागुरु गोरखनाथ, रामानंदाचार्य,कबीरदास,रैदास, तुलसी, दरियादास आदि तमाम संतों के साहित्यों, उपदेशों एवं प्रवचनों की ये भाषा रही है ।
मुख्य अतिथि डॉ.रामजन्म मिश्र ,अध्यक्ष -झारखंड राज्य भाषा साहित्य अकादमी ने कहा कि सबके अपनत्व की मातृभाषा है भोजपुरी, जिसका माधुर्य ह्रदय में रच बस जाता है ।सभी प्राथमिक विद्यालयों में मातृभाषा शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए ।
विश्व भोजपुरी संघ द्वारा प्राचीनतम मातृभाषा रही काशिका भोजपुरी के संवैधानिक सरंक्षण की काशी के सांसद प्रधानमंत्री से पुरजोर मांग की गई।उपस्थित लोगों में ई.कैटरीना-रुस,राहुल शाह,डॉ.दिनेश सिंह,ई.शंभूनाथ पांडेय, डॉ.बी.एन.द्विवेदी,स्वस्ति शंकर,राकेश तिवारी आदि प्रमुख थे।

