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भोजपुर:सीता की खोज में निकले राम,शबरी के जूठे बेर खाकर प्रसन्न हुए दोनों भाई।

आरा/ भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)28 सितम्बर।400 वर्ष पुरानी नगर रामलीला समिति के तत्वाधान में आज बनारस के कलाकारों द्वारा सीता खोज ,शबरी भेंट, सुग्रीव मिलन और बाली वध का मंचन किया गया. रावण के द्वारा सीता हरण के बाद राम और लक्ष्मण उनके खोज में घने जंगल में भटकते हैं जंगल में उन्हें शबरी मिलती है जो राम की परम भक्त होती है. सबरी राम और लक्ष्मण को अपने झूठे बेर खिलाती है. शबरी अपने गुरु मतंग ऋषि के कहने पर श्री राम की प्रतीक्षा कर रही थी जो उन्हें सुग्रीव से मिलने के लिए कहती है. शबरी के कहने पर राम और लक्ष्मण त्रि श्यमुक पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं. पर्वत पर उन्हें उन्हें राम भक्त हनुमान से मुलाकात होती है. हनुमान उन्हें बंदरों के राजा सुग्रीव से मिलवाते हैं और दोनों की मित्रता करवाते हैं. सुग्रीव ने बताया की धोखे से बाली ने उनका सारा राज पाठ हड़प लिया है बाली के सामने जाने पर उनकी शक्ति आदि हो जाती है. तब राम सुग्रीव के संकट दूर करने के लिए बालिका वध करते हैं .बाली के वध के बाद सुग्रीव श्री राम के कहने पर अंगद को अपने शरण में लेते हैं. इसके बाद वर्षा ऋतु बीतने पर वह अनुमान और अंगद के साथ वानर सेना सहित सीता की खोज में निकल पड़ते हैं.
शबरी का प्रेम:- प्रभु श्री राम के प्रति शुद्ध निस्वार्थ और अटूट भक्ति का रूप है जिससे नवादा भक्ति के अंतर्गत सिस्टम माना जाता है शबरी का प्रेम समर्पण और भाव का प्रतीक है जिसके कारण भगवान राम ने स्वयं उनके झूठे फल खाकर उनके प्रेम को स्वीकार किया या प्रेम सभी प्रकार के बंधनों और सामाजिक वर्जनाओं से परे था.
समर्पण:- वे लंबे समय तक भगवान राम की आने की प्रतीक्षा करती रही प्रतिदिन उनके लिए फल चुनती थी.
प्रतीक्षा:- गुरु मतंग ऋषि के वचनों पर विश्वास करके शबरी राम की भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर दिया.
भाव की प्रधानता:- भगवान राम ने उनके झूठे फलों का स्वाद इसलिए लिया क्योंकि वे सबरी के हृदय के शुद्ध भाव से रिझ गए थे.
सामाजिक बाधाओं मुक्ति:- भील समुदाय से होने के कारण उन्हें छूट माना जाता था लेकिन उनके प्रेम में ऐसी शक्ति थी कि भगवान ने उन्हें गले लगाया.
बाली और सुग्रीव के प्रकरण में यह पता चलता है कि अगर भाई भाई की तरह व्यवहार करें तो भाई से बड़ा भगवान कोई नहीं अगर वही भाई शत्रुता करें तो भाई से दुश्मन कोई नहीं. कलाकारों द्वारा इन सारे दृश्य को खूब बखूबी से निभाया गया.
सर्वप्रथम संस्था के सदस्यों द्वारा आए हुए अतिथियों का सत्कार किया गया और दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया कल के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि निशि जैन थी. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में धर्मेंद्र लाइट का एवं बनारसी टेंट का बहुत बड़ा योगदान है.
संस्था के संरक्षक मंडल में महंत 1008 किंकर दास जी महाराज ,लाल दास राय, रामेश्वर प्रसाद, केदार प्रसाद, लक्ष्मी नारायण राय ,और संस्था के अध्यक्ष सोनू राय, संयोजक संजीव गुप्ता, हाकिम प्रसाद, उपाध्यक्ष संजय महासेठ, उपाध्यक्ष दिलीप गुप्ता ,कोषाध्यक्ष मदन प्रसाद, उपाध्यक्ष शंभू नाथ केसरी ,सचिव शंभू नाथ प्रसाद, राकेश रंजन उर्फ पुतुल जी रोटी बैंक के सदस्य के साथ मीडिया प्रभारी पंकज प्रभाकर कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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