
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)20 फ़रवरी।श्री त्रिदण्डी स्वामी सेवा आश्रम ब्रह्मपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के पंचम् दिवस ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्रजी महाराज ने दशम् स्कंध में वर्णित श्रीकृष्ण चन्द्र जी के प्रक्ट होने के अनेक कारण बतलाते हुए कहा कि त्रेतायुग मे भगवान श्रीराम के रुप पर रीझे मिथलानियों, साधूसंतो को भगवान ने वचन दिया था कि मै मर्यादा अवतार में हूँ ,आपकी कामना पूरा नहीं कर सकता ,जब द्वापर मे आऊँगा तो आप सब गोप गोपी बनना,साथ ही पूर्व काल मे नंद यशोदा और वसुदेव देवकी को दिये गये वचन को पूरा करने हेतु श्रीकृष्ण धराधाम पर आये है। आगे आचार्य धर्मेन्द्र ने कहा श्रीकृष्ण जी का अवतार गोचारणन,पर्यावरण रक्षा,यमुना को विषमुक्ति के साथ ही साथ भूमंडल को अन्यायों ,अत्याचारियो से मुक्ति,भक्तों के साथ लीलाओं के माध्यम से प्रेमरस का संवंर्धन करते हुए धरती को पाप मुक्त करना है।आचार्य जी ने मथुरा के जेल मे श्रीकृष्ण का प्रकट होने,गोकुल मे नंद बाबा के घर मे जाने के क्रम मे यमुना जी मे आये उफान का तात्विक विवेचन सुन भक्त आनंदित होते रहे।झांकी के साथ आनंदोत्सव की कथा में जहां वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा प्रक्षेत्र गूंज उठा वहीं पारंपरिक मांगलिक गीतो यथा सोहर,बधाइयां, खेलौना, झूमर सुन भक्त झूमते रहे।भगवान श्रीकृष्ण के छठीहार मे पूतना के आने और उसके उद्धार की कथा कहते हुए अनेक रहस्यमयी शास्त्रीय प्रमाणों को प्रस्तुत हुये।जिसे सुनकर भक्त आनंदित होते रहे।
