
आरा/भोजपुर) डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)07 फरवरी। गुरूवार को पूज्य जीयर स्वामी के कृपापात्र विद्या वाचस्पति ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने शिवदेवी हनुमतधाम कारी साथ गांव मे आयोजित शिवपुराण ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस पार्वती संहिता की कथा कहते हुए बताया की संसार की पहले माता पिता हिमवान व मैना महारानी हैं जिन्होने पुत्री प्राप्ति के लिए तप किया।फलस्वरूप पार्वती पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई। आचार्य जी संसार के माताओं से निवेदन किया कि भ्रूणहत्या नहीं करावे।यदि पुत्री नहीं होगी तो बहु कहाँ से लाओगे,यदि लड़की नहीं होगी तो बुआ,मौसी,भाभी, कहा से आयेगी। पुरुष स्त्री अनुपात मे बढते विषमता की चर्चा करते हुये कहा कि यदि दहेज़ दानव का बध नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब किसी के बबुआ के हाड़ में न हल्दी नहीं लगेगी न माड़ो गाड़ने की जरूरत। आवाह्न करते हुए आचार्य जी ने कहा दहेज़ सामाजिक बुराई है , इसे मित्र कानून से नहीं दुर किया जा सकता, समाज को आगे आना होगा,कानून केवल सहयोगी होगा। शिवपार्वती विवाह की चर्चा करते हुये आचार्य जु ने कहा कि शिवजी के आदेश विवाह के पूर्व विधिवत पार्वती कन्या का पूजन हुआ,फिर वर के रुप में शिवजी का पूजन हुआ ,पश्चात वैदिक ऋति से विवाह संस्कार संपन्न हुआ।वर पक्ष के द्वारा किसी प्रकार का दान दहेज़ की मांग नहीं हुईं, पर कन्या पक्ष से देने मे कोई परहेज नहीं की गई। कन्या पूजन और वर पूजन मे जहाँ वैदिक मंत्रो से पूरा प्रक्षेत्र गूंज उठा वहीं पारम्परिक मागलिक गीत कि भी खुब गायन हुआ।अन्त मे आचार्य जी ने कहा शिवपार्वती विवाह कलियुग की सहज साधना है,इसके श्रवन,मनन,दर्शन से अर्थ, धर्म ,काम,मोक्ष की प्राप्ति होती है।कथा मे दूर दराज से भक्त पधार रहे है।कल शिवपार्वती का विवाह संपन्न होगा जिसकी तैयारी मे आज से ही भक्त लग गये है। आयोजन को सफल बनाने मे कर्नल राणा सिह, सुरेंद्र सिह, वीरवल सिंह,अशोक सिह आदि भक्त सब अथक प्रयास कर रहे है।
