भोजपुरी भाषा साहित्य के उच्च अध्ययन और शोध में मिलेगी सुविधा।
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)11 जनवरी।वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग का विभागीय पुस्तकालय देश ही नहीं विश्व के सबसे बड़े भोजपुरी पुस्तकालय बनने की दिशा में अग्रसर है। स्थापना काल 1992 से ही संचालित विभागीय पुस्तकालय में पहले से भोजपुरी की हजार से ऊपर पुस्तकें और सैकड़ों की संख्या में शोध ग्रन्थ उपलब्ध थे। हाल ही में भोजपुरी के चर्चित साहित्यकार पांडेय कपिल के भोजपुरी संस्थान, भोजपुरी पुस्तकों के सबसे बड़े डिजिटल संग्रह भोजपुरी साहित्यांगन, रांची के चिकित्सक दंपत्ति डॉ संगीता ओझा और डॉ अजीत ओझा तथा भोजपुरी साहित्य सरिता के संपादक जे पी द्विवेदी और सर्व भाषा ट्रस्ट से पुस्तकें विभागीय पुस्तकालय को दानस्वरूप मिली हैं। पांडेय कपिल की सुपुत्री अंबुजा सिन्हा के सहयोग से तकरीबन 2500 पुस्तकें, डॉ संगीता ओझा तथा डॉ अजीत ओझा के सहयोग से उनके पिताजी ई नमोनाथ जी लिखित तथा अन्य 350 पुस्तकें, भोजपुरी साहित्यांगन के संस्थापक डॉ रंजन प्रकाश तथा डॉ रंजन विकास की ओर से 500 पुस्तकें तथा सर्व भाषा ट्रस्ट और जे पी द्विवेदी के सौजन्य से लगभग 300 पुस्तकें भोजपुरी विभाग को प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा साहित्यकार कनक किशोर, मार्कण्डेय शारदेय तथा अन्य साहित्यसेवियों के सौजन्य से समय समय पर भोजपुरी पुस्तकें प्राप्त हुई हैं। कुल मिलाकर भोजपुरी विभाग के पुस्तकालय में भोजपुरी की तकरीबन 5000 पुस्तकें निकट भविष्य में शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हो जाएंगी। देश ही नहीं विश्व के किसी भी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में भोजपुरी पुस्तकों का यह सबसे बड़ा संग्रह होगा। भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर पांडेय ने बताया कि पुस्तक दानदाताओं को विभाग की ओर से सम्मानस्वरूप आभार पत्र दिया जाएगा और पांडेय कपिल की सुपुत्री अंबुजा सिन्हा को दिया भी जा चुका है। पुस्तकालय के लिए अलग से एक कक्ष को व्यवस्थित तथा विभाग को सौंदर्यीकृत किया जा रहा है। विभाग के छात्रों ने कहा कि विभाग में अब नए क्लासरूम और शोध कक्ष की आवश्यकता है और विभाग को पूर्ववत हिंदी विभाग की ओर विस्तारित किया जाए। नैक मानकों के अनुसार विभाग में नियमित पत्रिकाएं आती हैं इसके अलावा नए पुस्तकालय कक्ष में ई लाइब्रेरी सुविधा के लिए इंटरनेटयुक्त कंप्यूटर की व्यवस्था की जाएगी। नैक मानकों के अनुरूप भोजपुरी विभाग तैयार किया जा रहा है और भविष्य में इसे भोजपुरी का उच्च अध्ययन केंद्र बनाया जाएगा।

