
आरा/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 9 जनवरी। फुटाब के अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव विधान पार्षद संजय कुमार सिंह ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के वेतन एवं बकाया डीए के भुगतान करने हेतु राशि विमुक्त करने के संबंध में बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है। फुटाब अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह (विधान पार्षद) ने शिक्षा मंत्री को पत्र में लिखा है कि 50 हजार करोड़ का बजट प्रति वर्ष डील और वितरित करने वाले बिहार के शिक्षा विभाग को 45 हजार करोड़ वितरित करते समय किसी हाय तौबा की आवाज सुनाई नहीं पड़ती है। लेकिन विश्वविद्यालयों के सलाना लगभग 4.5 से 5 हजार करोङ रुपये मासिक वेतन एवं पेंशन के भुगतान हेतू पूरे वर्ष भर समीक्षा चलती रहती है। समीक्षा के नाम पर कभी तदर्थ भुगतान तो कभी तीन-तीन माह पर भुगतान किया जाता है। विभाग ने दो माह के पेंशन का पत्र निकाल दिया लेकिन उसमे भी टीएमबीयू के लिए मात्र नवंबर का पेंशन स्वीकृत किया है। हर स्तर पर भेदभाव की स्थिति उत्पन्न की जा रही है जो किसी भी तरह स्वस्थ परम्परा कायम करने के अपेक्षित सोच से परे है। विभाग ने समीक्षा के क्रम में जो जानकारी मांगी है वो पूरी तरह अनावश्यक और हास्यास्पद भी है। जैसे पेंशनर और पारिवारिक पेंशनरों की संख्या (जो हर माह बदलती है), बीपीएससी एवं आयोग से नव नियुक्त शिक्षकों की संख्या, स्वीकृत पदों की संख्या। जबकि सरकार ने दशकों से कोई नया पद सृजित नहीं किया है। शिक्षकों की जो सूची सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों को प्रेषित की जाती है उसी पर बहाली होती है। शिक्षा विभाग ने नवंबर माह में ही इनकी संख्या की गणना कर एनपीएस योजना लागू करने हेतू राशि विमुक्त की है। किसी भी बजट समीक्षा पश्चात सरकार की ओर से यह नहीं कहा गया कि विश्वविद्यालयों ने वेतन, पेंशन मद में वास्तविक राशि से अधिक मांग की है। नेता द्वय ने कहा कि ताश के 52 पत्तों को कितना भी फेंटे वे 52 के 52 ही रहेंगे। फुटाब अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह (विधान पार्षद) ने पत्र मे लिखा कि विभाग अपना वर्चस्व दिखाने हेतू बजट समीक्षा को ताश के पत्तों की तरफ फेंटना बंद करें और यथाशीघ्र वेतन तथा बकाया डीए एकरूपता बरतते हुए सभी विश्वविद्यालयों को राशि विमुक्त करे।
