
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)20 अक्टूबर। शनिवार को श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ व संगीतमय श्रीमदभागवत भक्ति ज्ञान कथा यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर महायज्ञ में देवी देवताओं की वैदिक रीति रिवाज से पूजन यज्ञ के आचार्य गणों ने वेद मंत्रों की ध्वनि से की।जनता जनार्दन श्रीमन नारायण नाम और जय श्री राम, जय श्री कृष्ण नाम लेते हुए प्रदक्षिणा चला।
श्रीमद भागवत कथा व्यास श्री श्री १००८ श्री गदाधराचार्य(माचा स्वामी जी) के परम शिष्य श्री शशि भूषण जी महाराज ने अनेकों कल्प में की व्याख्यान करते हुए, प्रत्येक मन्नतर में प्रभु ने अवतार लिया।मुख्य २४ अवतारों के ऊपर प्रकाश डाले जिसमें तीन अवतार श्रेष्ठ है । प्रभु की अवतार सिर्फ राक्षसों को मारने हेतु नहीं बल्कि अपने भक्तों की उद्घारता का भी हेतु होता है।संत तुलसीदास ने मानस रामायण के कहा है ” राम जन्म कर हेतु अनेका ” और “विप्र धेनु सुर संत हित, लिन मनुज अवतार”। यह चौपाई मानस से साबित होता की प्रभु अपने भक्तों के ऊपर कृपा हर पल रखते है। अजामिल ब्राम्हण विद्वान था पर कुसंग में पर कर उसकी बुद्धि मारी गई और वह आततायी बना, दिन रात गलत कार्य करता था, संतों ने उसके पुत्र की नाम नारायण रखवाया, उन संतों की वचनों को मानकर, अपने जीवन में आत्म सात कर जीवन को धन्य बनाया और स्वर्ग तक पहुंच गया। क्योकि कहा गया कि” मात पिता,गुरु की बानी बिन विचार करही शुभ जानी, जो मानस की चौपाई सटीक बैठा है।कथा के बाद प्रतिदिन की तरह प्रसाद में फल की वितरण हुई। इसकी सूचना इस आयोजन के मुख्य राज कुमार कुशवाहा,विनोद जी विनय यादव ने दिया।
