
RKTV NEWS/लखनऊ ( उत्तर प्रदेश)01 अक्टूबर।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर शांति सदभावना काव्य दर्पण सम्मान समारोह का आयोजन एस.एस.डी. पब्लिक स्कूल सुनेहरा नहरिया, विजय नगर पुलिस चौकी के पीछे, कृष्णानगर, लखनऊ में देहदानी, लखनऊ हाईकोर्ट के अधिवक्ता रामानन्द सैनी के प्रमुख संरक्षण में, लखनऊ काव्य संगम के संस्थापक कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक के प्रमुख संयोजन/ संचालन में प्रतापगढ़ के प्रख्यात कवि रविन्द्र पाण्डेय निर्झर प्रतापगढ़ी के अध्यक्षता में अयोध्या के कवि सुखमंगल सिंह मंगल – मुख्य अतिथि के गरिमामयी उपस्थिति में कवयित्री सुनीता चतुर्वेदी के संयोजन में दीपदान पूर्वक शांति सदभावना काव्य दर्पण सम्मान साहित्यिक रचनाकारों को स्वागताध्यक्ष कवि गिरिराज शर्मा ठेठ मलिहाबादी ने भेंट किया। मां सरस्वती का वन्दना करते हुए ठेठ मलिहाबादी ने -मां शारदे-मां शारदे, मेरे शब्द को संवार दे, इंद्रजीत निर्भीक ने- गांधी जी एवं शास्त्री जी अदभुत अनोखा विचारवान थे, रहते थे धरा पर लेकिन उनके सोच सचमुच आसमान थे, डॉ. राकेश प्रताप सिंह ने – गांधी जी ने देश के लिए एक नई ज्योति जलाई,निलेश ज्वाला – राजहंस लखनवी ने – प्रेम का लुटता हुआ हर क्षेत्र में संसार दिखता, शशि नारायण त्रिपाठी ने- देव जगत आराध्य नियंता कण-कण में श्रीराम, दीन-हीन सब जन के स्वामी चलिए उनके धाम, रामानन्द सैनी ने -माना कि मंदिरों में भगवान् नहीं मिलते, बेजान पत्थरों में भगवान् नहीं मिलते, प्रेम शंकर शास्त्री ने – सत्य का पथ दिखाते रहे रात-दिन, लक्ष्य की धुन सुनाते रहे रात-दिन, डॉ. सत्यदेव प्रसाद द्विवेदी पथिक – प्रधानाचार्य ने -कहीं जो त्रिशूली ना होते त्रिपुंडी कभी तीसरा नेत्र क्या काम आता, सदा चक्रधारी ना होते मुरारी झुका शीश कोई कभी गान गाता, सुनीता चतुर्वेदी सुधा – लखनवी ने -हर युग में सीता भले न हो,नारी की परीक्षा जारी है सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वागत संबोधन गिरिराज शर्मा ठेठ मलिहाबादी, कवयित्री सुनीता चतुर्वेदी- सुधा लखनवी ने के किया। धन्यवाद आभार देहदानी रामानन्द सैनी ने किया।
