
RKTV NEWS/व्यंग्य (राजेंद्र शर्मा)19 सितंबर।अब बोलें क्या कहते हैं मोदी जी के राज में लीक का शोर मचाने वाले? कितना शोर मचाया था, जब अयोध्या में राम मंदिर पहली ही बारिश में लीक करने लगा था। राम मंदिर में भी भ्रष्टाचार से लेकर, एक हजार साल के दावे और एक साल का भी इंतजाम नहीं तक, न जाने क्या-क्या नहीं कहा था। और जब नई-दिल्ली में प्रगति टनल में पानी भर गया और आखिरकार सात सौ करोड़ रूपये की टनल को पूरा उखाडक़र दोबारा बनाने का फैसला करना पड़ा था, तब बंदों ने खा गए, खा गए का कितना हंगामा किया था। सिर्फ इसलिए कि टनल का उद्घाटन बेचारे मोदी जी ने किया था और उन्होंने टनल को विज्ञान का चमत्कार भी बताया था, भाई लोग उनके हाथ लगाने में पनौती खोजने में नहीं चूके थे। और फिर जब मोदी जी की बनायी नयी संसद ने लीक करना शुरू किया और पानी जमा करने के लिए प्लास्टिक की बाल्टियों की सरकारी खरीद करनी पड़ी, तब तो पनौती सूंघने वालों की मौज ही आ गयी। शोर मचा दिया कि मोदी जी का हाथ लगा, तो लीक की गारंटी है। इमारत में हाथ लगा दें, तो इमारत के लीक करने की गारंटी है और अगर कोई परीक्षा-वरीक्षा करा दें, तो पेपर लीक की गारंटी है। पर अब विरोधी क्या कहेंगे — अब तो मोदी जी के हाथ लगाने से सैकड़ों साल पहले बना ताजमहल भी लीक कर रहा है।
जी हां! इस बारिश ने ताजमहल को भी लीक करा दिया। पुरातत्व सर्वे वालों की मानें, तो ताजमहल का मुख्य गुंबद लीक करने लगा है। बस इसका पता अभी नहीं लगा कि गुंबद रुक-रुक कर लीक कर रहा है, या लगातार लीक किए जा रहा है। हां! इतना पक्का है कि पानी रिसने से लीक हो रहा है और इमारत के लिए कोई खतरा नहीं है। खैर! खतरा तो संसद भवन के लिए भी किसने देखा था, फिर भी चंद बाल्टी पानी आने से ही पनौती-पनौती का शोर तो मच गया। हां! एक बात मोदी जी के लिए जरूर अच्छी हो गयी कि अब चाहे कोई भी इमारत लीक करे, कोई मोदी जी को इसका उलाहना नहीं दे सकेगा कि साढ़े तीन सौ साल पुराना ताजमहल तो लीक नहीं करता ; फिर मोदी जी राज के वास्तु में ही क्या खास है, जो भी बनाते हैं, लीक करने लगता है। बारिश की भी शिकायत झूठी है, उसी बारिश में ताजमहल भी तो खड़ा है, पर ताजमहल तो लीक नहीं करता है! पर वो दिन लद गए, जब ताजमहल लीक नहीं करता था। इस बार की बारिश में तो ताजमहल भी लीक कर गया, फिर मोदी जी के संसद भवन या राम मंदिर के लीक करने पर ही शिकायत क्यों की जाती है?
अब अगर यह देश ताजहमल का लीक होना सहन कर सकता है, तो नयी संसद या नये राम मंदिर के लीक करने पर ही हंगामा क्यों? शाहजहां की इमारत लीक करे तो ठीक और मोदी जी की बनवाई इमारत लीक करे तो भ्रष्टाचार, यह तो कोई बात नहीं हुई। अगर इमारत के लीक होने से ही भ्रष्टाचार की जांच होने लगी, तो फिर शुरूआत क्यों नहीं, शाहजहां के टैम के भ्रष्टाचार से ही हो? भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचार है, मुगलों का हो तो और नेहरू वगैरह का हो तो; मोदी जी माफ नहीं सकते हैं। मोदी जी के न खाऊंगा न खाने दूंगा, में न खाने दूंगा खासतौर पर पुराने टैम के खाने वालों के लिए है। और बात निकलेगी तो पीछे दूर तक जाएगी। मोदी जी शाहजहां से एक-एक पाई का, टपके की एक-एक बूंद का हिसाब लेकर रहेंगे। ताजमहल को मंदिर बनवाने का संघ परिवारियों का प्रोग्राम कैंसल! अकेले राम मंदिर ही लीक क्यों करे ; मंदिर के बराबर में, लीक करने वाला मकबरा भी तो होना चाहिए।
(व्यंग्यकार वरिष्ठ पत्रकार और ‘लोकलहर के संपादक हैं।)
