
RKTV NEWS/रामगढ़(झारखंड )13 मई।झारखंड के रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखण्ड में स्थित ‘उसरा’ गाँव की सीमा कुमारी (पति, सुबोध कुमार महतो) आज एक नई उम्मीद और आत्मविश्वास की मिशाल है। यह मिशाल उस बदलाव की है जो सीमा कुमारी ने अपने कड़े संघर्ष और लगन से हासिल किया है। सीमा कुमारी केवल एक गृहिणी नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं, लेकिन यहाँ तक पहुँचने का सफर अभावों और आर्थिक अनिश्चितताओं से भरा हुआ था। सीमा कुमारी एक साधारण और गरीब परिवार से है। उनके पति गाँव में ही छोटी-मोटी खेती और दुकान के जरिए परिवार का बोझ उठाने की कोशिश करते थे। सात सदस्यों के परिवार में सीमा के अलावा उनके पति, एक बेटा, दो बेटी और सास एवं ससुर हैं। इस परिवार की जरूरतें बड़ी थीं, लेकिन आमदनी महीने की मुश्किल से 6,000 रुपये तक होती थी। इतने कम पैसों में घर चलाना, बच्चों की परवरिश और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। सबसे बुरा वक्त तब आता था जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती थी। गाँव के महाजनों से कर्ज लेना आग में हाथ डालने जैसा था, क्योंकि वहां ब्याज दर 10% मासिक (100 रुपये पर 10 रुपये से अधिक) थी। इस भारी ब्याज के जाल में फंसकर कर्ज चुकाना नामुमकिन सा लगता था।*
सीमा के जीवन में बदलाव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई, जब झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की सक्रिय महिलाओं ने उसरा गाँव में एक विशेष ड्राइव चलाया। तीन सीआरपी (CRP) दीदियों ने गाँव में पाँच दिनों तक रहकर महिलाओं को एकजुट किया और उन्हें समूह से जुड़ने के फायदों के बारे में बताया। दिनांक 28-06-2017 को ‘ज्योति सखी मण्डल’ का गठन किया। सीमा कुमारी ने भी इस अवसर को पहचाना और समूह की सक्रिय सदस्य बनीं। यहाँ उन्हें केवल ऋण ही नहीं, बल्कि बैंक लिंकेज, आरएफ (RF), सीआईएफ (CIF) और हिसाब-किताब रखने के लिए बुक-कीपिंग का प्रशिक्षण भी मिला। उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें सीएलएफ (CLF) का लेखापाल भी बनाया गया।
समूह से जुड़ने के बाद सीमा ने अपने सपनों को साकार करने के लिए बड़ा कदम उठाया। जहाँ पहले उसे महाजनों से ऊँची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता था, अब समूह के माध्यम से उन्हें मात्र 1% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध था। उन्होंने बैंक लिंकेज और समूह के माध्यम से कुल 70,500 रुपये की ऋण राशि प्राप्त किया और उसमें से 70,000 रुपये का निवेश कर अपना खुद का ‘बॉयलर (सोनालिका) मुर्गी फार्म’ शुरू किया। जिसमे एक बार में 300 चूजा फार्म में छोडती थी। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा बदलाव था। उन्होंने केवल मुर्गी पालन ही नहीं किया, बल्कि खेती के पुराने तरीकों को छोड़कर वैज्ञानिक पद्धति को अपनाया।
आज सीमा कुमारी की मेहनत रंग ला रही है। उनके पोल्ट्री फार्म से अब उन्हें प्रति माह लगभग 3,500 रुपये की कमाई हो रही है और खेती से हर सत्र 10000 रुपया, साथ ही, उनकी जनरल स्टोर की दुकान से भी अब 2,000 रुपये की मासिक आय हो रही है। इन सभी गतिविधियों से हर वर्ष लगभग 120000 रूपया से अधिक की आय हो रही है। इस आर्थिक मजबूती ने उनके परिवार की तस्वीर बदल दी है। अब न केवल घर का भरण-पोषण अच्छे से हो रहा है, बल्कि वे अपने बच्चों को एक बेहतर और उच्च शिक्षा देने में भी सक्षम हैं। जो परिवार कभी कर्ज के डर से सहमा रहता था, आज सीमा ने अपने बच्चो का GPS पब्लिक स्कूल जमीरा में नामांकन कराई है, आज सीमा को खुद पर गर्व है।
सीमा कुमारी की पहचान अब केवल उनके घर तक सीमित नहीं है, बल्कि उसरा गाँव और आसपास के क्षेत्रों में भी लोग उन्हें एक सफल महिला के रूप में जानते हैं। उनके भविष्य के इरादे और भी ऊंचे हैं। वे अपने पोल्ट्री फार्म को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं और वैज्ञानिक खेती के विस्तार की योजना बना रही हैं। उनका सबसे बड़ा सपना अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देकर उन्हें प्रतिष्ठित नौकरियों में देखना है। सीमा कुमारी का यह सफर साबित करता है कि अगर सही अवसर और सहयोग मिले, तो एक ग्रामीण महिला न केवल अपना भाग्य बदल सकती है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक नई राह भी बना सकती है।
