
पटना/ बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 6 सितम्बर। अखंड सुहाग की कामना हेतू सुहागिन महिलाओं ने हरतालिका तीज व्रत किया। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर हरितालिका तीज का व्रत किया। पूरे दिन व्रत रखकर महिलाओं ने शाम में शिव-पार्वती और गणेश जी की पूजा अर्चना की।

सुहागिन महिलाओं ने नये वस्त्र धारण कर भगवान शंकर, पार्वती जी और गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति बनाकर उस पर फूल, माला, अक्षत, रोली, चंदन, फल, भांग, धतूरा आदि चढ़कर शंकर-पार्वती के साथ-साथ विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा अर्चना की।

पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और सुख एवं समृद्धि की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने निराहार व निर्जला रह कर तीज व्रत किया।

भगवान शिव के समान ही सुयोग्य पति की कामना हेतु कुछ कुंवारी लड़कियाॅ भी इस व्रत को करती हैं। ज्योतिषाचार्यों एवं पंडितों के अनुसार इस वर्ष हरितालिका तीज के अवसर पर शुक्ल योग, अमृत योग और रवि योग का सुयोग पङा है जो बेहद शुभ माना जाता है।

इस वर्ष तृतीया एवं चतुर्थी तिथि का युग्म सुयोग अति शुभकारी गौरी-गणेश योग व मातृ-पुत्र योग है। ज्योतिषाचार्यों एवं पंडितों के अनुसार इस अति शुभ नक्षत्र एवं सुयोग मे व्रत करने से अक्षुण्ण सौभाग्य, सुख-समृद्धि, निरोग काया, पति के चिरायु होने, यश, वैभव एवं कीर्ति के साथ सभी मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होगा। कुल मिलाकर देखा जाय या लब्बोलुआब यह है कि ग्रह-गोचर के उत्तम संयोग में सुहागिन महिलाओं ने हरितालिका तीज का व्रत किया।
