
क्या मनाऊँ !
आज समझ नहीं पाता
कि क्या मनाऊँ!
आजादी का जश्न
या शहीद हुए भाईयों का मातम ।
आजाद हुआ
हर्षित हुआ
पर कितनों भाईयों को
खो दिया
इसका बहुत गम हुआ
इस दशा में
समझ नहीं पाता
कि क्या मनाऊँ!
आजादी का जश्न
या शहीद हुए भाईयों का मातम।
आजादी की आग में
कितनों के लाल
हो गये जल फतिंगों सा खाक
कितनों बहनों के
जल गये रुई सी सुहाग
कितनों घरों के
बुझ गये चिराग
उनके घर
पसरी देख उदासी सर्वत्र
कलेजा हो जाता टूक टूक
इस दशा में
आज समझ नहीं पाता
कि क्या मनाऊँ !
आजादी का जश्न
या शहीद हुए भाईयों का मातम ।

