
RKTVNEWS/आरा (भोजपुर)07 अगस्त। आज की विकसित दुनिया में जहां दुनिया के किसी भी कोने की खबरें हम तक सोशल मीडिया आदि के माध्यमों से पहुंच जाती हैं। लेकिन कुछ ऐसी भी प्रेरणादायक समाज को सामाजिक संदेश सकारात्मक सोच और दिशा प्रदान करने वाली खबरें है जो कुछ हद तक ही हम तक पहुंच पाती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायी,सामाजिक संदेश वाली खबर से आज आपको रूबरू कराते हुए एक शख्स की रोचक कहानी से अवगत कराएंगे।
कहानी है आरा सदर प्रखंड अंतर्गत बसंतपुर पंचायत के गंगा किनारे बसे मौजमपुर की प्रसिद्ध कुंवारी सती माई से घिरे गांव सारसिवान में निवास करने वाले देवकांत ओझा की जो धार्मिक आस्था और धर्म में आस्था रखने वालो के बीच काफी प्रचलित हैं।
घर घर पहुंचाते हैं पूजा हेतु पुष्प
किसान परिवार में जन्मे 45 वर्षीय देवकांत ओझा के बारे में जो चर्चा आम है वो है उनकी धर्म के प्रति आस्था। श्री ओझा खुद गृहस्थ आश्रम में जीवन यापन करते हुए सारी पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों के निर्वाहन को बखूबी निभाते हुए ईश्वर की आराधना तो करते ही है साथ ही नित्य सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गांव के बागीचों आदि से पुष्प तोड़कर गांव के घरों में पूजा पाठ हेतु निस्वार्थ भाव से पहुंचाया करते हैं फिर वो कोई भी मौसम हो इनकी नित्य क्रिया कभी भी बाधित नहीं हुई।
ईश्वरीय आराधना का सर्वोत्तम मार्ग
किसान परिवार में जन्मे वर्ष 1991 में हाई स्कूल तक की पढ़ाई पूरी कर 19 वर्ष की आयु में दांपत्य सूत्र में बंधने वाले देवकांत ओझा ने पुष्प वितरण की अपनी नित्य क्रिया के बारे में प्रफ्फुलित मुद्रा में बताते हुए अपनी भाषा में कहा की खुद ईश्वरीय आराधना करते हुए दूसरो को भी उनकी पूजा और आराधना में मदद करने से ईश्वरीय कृपा पाने का मार्ग सरल और सार्थक हो जाता है। ऐसा करने से मुझे आत्मिक शांति की अनुभूति तो होती ही है साथ ही पूजा में ग्रामीणों की छोटी सी पुष्परूपी सहयोग करने से मेरा गांव वालों के प्रति कर्तव्य भी फलीभूत होता है जो मेरी गांव वालो की लिए एक जिम्मेवारी की कड़ी के रूप में शामिल है।श्री ओझा ने बताया की इन सार्थक कर्मो के कारण ही आज मैं अपनी पत्नी और दो बच्चों सहित खुश हूं। उन्होंने बताया की उनकी दो संताने एक लड़का और एक लड़की है जिनकी प्रारंभिक शिक्षा के लिए उनका नामांकन आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है।
फसल पर होती है ईश्वरीय कृपा
पारिवारिक पेशा कृषि को अपनाने वाले देवकांत ओझा द्वारा की गई खेती के बारे में चर्चा करते हुए इनके मित्र सतीश तिवारी ,दीनानाथ तिवारी, ध्रुव नाथ तिवारी,सिद्धनाथ तिवारी , चंदेश्वर तिवारी,आदि ने बताया की श्री ओझा द्वारा धार्मिक आस्था में किए जा रहे नित्य कार्य का परिणाम उनकी खेती में ईश्वरीय कृपा के रूप में साफ झलकती है।लोगो ने बताया की निर्धन होने के कारण दूसरों से मालगुजारी पर खेत लेकर खेती बारी में जैविक खाद की प्रमुखता देने वाले देवकांत ओझा की खेती सभी की खेती से सदैव उन्नत और पुष्ट होती है और इसी जीविका से वे अपने और अपने परिवार का भरण पोषण करते है और खुशहाल जीवन व्यतीत करते हैं। उनके मित्रो ने बताया की सात्विक आहार लेने वाले और धर्म में आस्था रखने वाले श्री ओझा की पत्नी का भी इनकी आस्था में पूर्ण सहयोग रहा है एवं वो भी इनकी आस्था के पदचिन्ह पर कदम से कदम मिलाती हुई नित्य गांव के मंदिर में पूजा अर्चना में पहले नजर आती है।

