
नई दिल्ली/तहसीन फात्मा,04 अगस्त।नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (आईआईसीसी) के चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के साथ-साथ इस बार वोटर्स भी बहुत सक्रिय दिख रहे हैं। इस्लामिक सेंटर की दिन-ब-दिन ख़राब होती जा रही स्थिति को लेकर इसके लाइफ़ मेम्बर्स काफ़ी दुखी हैं। सेंटर के पुराने और काफ़ी सक्रिय सदस्य और पूर्व आईआरएस अधिकारी डॉ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आईआईसीसी की स्थिति तेज़ी से ख़राब होती जा रही है। इसलिए इस बार के चुनाव में इसके वोटर्स को विवेकपूर्ण ढ़ंग से अपने मताधिकार का प्रयोग करना होगा। डॉ अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि इस बार के चुनाव में रिश्ता निभाने का नहीं बल्कि इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर को बचाने के लिए वोट करना है। डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि ये आख़िरी अवसर है आईआईसीसी को बचाने का। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय सचिव और अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अफ़ज़ल अमानुल्लाह को छोड़कर अध्यक्ष के बाक़ी सभी उम्मीदवार मेरे 25 से 30 साल से मित्र हैं उसके बावजूद मैं श्री अमानुल्लाह को आईआईसीसी के अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार मानता हूं। डॉ अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि अफ़ज़ल अमानुल्लाह से एक सप्ताह पहले मेरी भेंट हुई है। लेकिन जब मैंने उनके बारे में अपने सूत्रों से पता करवाया तो मैं बहुत प्रसन्न हो गया। श्री अमानुल्लाह उच्च शिक्षाप्राप्त, अनुभवी, योग्य, कर्मठ, और देश व समाज के लिए समर्पित इंसान हैं। डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि आईआईसीसी को लेकर जब मैंने श्री अमानुल्लाह से बात की तो उनके विचार और सेंटर को लेकर उनके इरादे मुझे बहुत प्रभावित कर गए। मैं चाहता हूं कि इस बार वोटर्स रिश्ते-नाते का ख्याल न करके आईआईसीसी को दुनिया का एक आदर्श सेंटर बनाने के लिए वोट करें।
डॉ अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि देश और समाज की सेवा करना मेरा पैशन है। मैं चाहता हूं कि इस बार अच्छे लोगों के कंधे पर आईआईसीसी की ज़िम्मेदारी डाली जाए ताकि सेंटर का वास्तव में विकास हो सके। अभी ये सेंटर राजनीति, पीआर और निजी हित साधने का केंद्र बन कर रह गया है। सदस्यों को किसी भी तरह की सुविधा नहीं है। कार पार्किग के लिए भी जद्दो जेहद करनी पड़ती है। मेम्बर और नॉन मेम्बर में कोई फ़र्क नहीं है यहां। डॉ अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि यहां सूईट बुक करने के लिए भी लाइफ़ मेम्बर को पापड़ बेलने पड़ते हैं। ये सेंटर घपले-घोटालों का केंद्र बन गया है। पिछले बीस साल से जीत रहा पैनल सत्ता के लालच में एक-दूसरे पर मुक़दमा करके आईआईसीसी का करोड़ों का नुक़सान कर चुका है। देश और दुनिया में बदनामी हो चुकी है। सेंटर की साख़ पर बट्टा लग चुका है। इसलिए मैं चाहता हूं कि पुराने जीते हुए कोई भी सदस्य इस बार जीतने नहीं चाहिए। सेंटर का रुतबा बढ़ेगा तो इसके सदस्यों का मान-सम्मान बढ़ेगा।
