मजदूरी का आधा भी पैसा नहीं देते हैं ठेकेदार,इसकी जांच हो : महामंत्री आर डी सिंह
पटना/बिहार (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 जुलाई। सोमवार को फ़ूड एण्ड एलाइड वर्कर्स यूनियन बिहार की एक आवश्यक बैठक राजा बाजार पटना कार्यालय में गनौरी शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में बिहार राज्य खाद्य निगम में बोरा ढोने वाले मजदूर व प्रतिनिधि के रूप में सदस्य उपस्थित हुए। उपस्थित सदस्यों का स्वागत महामंत्री रामदयाल सिंह ने किया। उनके हौसला को बढ़ाते हुए कहा कि मजदूर भाइयों आप सभी को निराश और हताश होने की जरूरत नहीं है ।आपके सबों के कार्य और समस्याओं का निदान और जो भी वैधानिक रुप से लाभ मिलने वाले हैं वह आवश्य मिलेगा।आप धैर्य और शांति पूर्ण माहौल बनाये रखें,बगैर किसी लोभ लालच के ईमानदारी और मेहनत से काम करें ।जरूरत है कि आप सभी एकजुट रहे, संगठन के नियम और निर्देश का पालन करें।आपके हर लंबित कार्य पूरे होंगे। कोई बाल भी बांका नहीं कर सकेगा ऐसा विश्वास रखें।
कई जिला से पधारे मजदूरों ने अपनी समस्या और व्यथा को रखा। जिसमें मूल रूप से समस्या निकाल कर सामने आई की मजदूरों के साथ ठेकेदार और जिला प्रबंधक मनमानी रूप से काम करते हैं, काम करवाते हैं लेकिन मजदूरी का पैसा देने में आनाकानी करते हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि ठेकेदार पैसा देने के पूर्व ही उन अनपढ़ मजदूरों से रेवेन्यू टिकट लगाकर दस्तखत करा लेते हैं।जिस पर ना कोई डेट और ना कोई निर्धारित दर,न बोरा की संख्या लिखा जाता है। इससे भी बड़ी बात है कि जिन मजदूरों का मजदूरी वैधानिक रूप से,सरकारी निर्धारित दर से, विभागीय पुनरीक्षित दर जो लागू है उससे कितना कम लेते हैं यह सुनकर और भी आश्चर्य होता है।
वर्तमान में सरकारी निर्धारित दर ₹11 20 पैसे और पुनरीक्षित दर 11.60 प्रति बोरा है। लेकिन ठेकेदार के माध्यम से अलग-अलग जिला में – जिसमें रु4/- 5/- 6/- 7/- 8/- प्रति बोरा के दर से भुगतान किया जा रहा है। ईपीएफ और ईएसआईसी प्रबंध निदेशक के आदेश के बाद सुबिधा अप्राप्य है।अंतरराशि का बकाया,जो बैंक खाता में भेजने का आदेश है उसे भी अनदेखी की गई और एक दो जिला में देकर करोड़ों रुपए जिला प्रबंधक और ठीकेदारी से मिलकर गवन किया गया।
इसकी भी जांच विजिलेंस से करने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
यह अजीब विडंबना है जो मजदूर दिन भर अपने कंधे पर बोरा उठता है ,उसके निर्धारित मजदूरी भी नहीं मिले,ऐसा घोर अन्याय हो रहा है।आज तक इन मजदूरों की सूधी लेने वाला कोई नहीं हुआ।
महामंत्री रामदयाल सिंह बताया कि आजादी के 75 साल का जश्न पूरा देश मनाया। खूब प्रगति और विकास की बातें हुई लेकिन इन मजदूरों को कोई न्यूनतम मजदूरी भी आज तक कोई नेता,न मंत्री भी नहीं दिया पाया। यही है देश का सच्चा लोकतंत्र और सेवा में लगे हैं हमारे जनप्रतिनिधि जिन्हें केवल वोट की चिंता तो रहती है ,लेकिन इन मजदूरों के प्रति कभी संवेदना,अपनापन, दुख दर्द बांटने का प्रयास और ना कभी आंसू पहुंचने की बात दिल में आई।इन्हें पता नहीं है कि इन मजदूर के बाल बच्चे और परिवार कैसे खाता,रहता,पढ़ता और शादी कैसे होती होगी।अंत में मजदूरों ने अपनी संगठन की चट्टानी एकता और हाथ उठाकर संकल्प लिया कि अब हम निर्धारित दर से ₹1 कम और न ₹1 ज्यादा लेंगे।
इसके लिए धरना प्रदर्शन और अनशन का सामुहिक निर्णय लिया गया। इसकी तिथि और कार्य योजना निर्धारित होगी उसकी सूचना सभी जिला को प्रेषित की जाएगी।

