
बक्सर को हमें विकास का भागीदार बनाना है, डालमियानगर नहीं :डॉ० विनोद कुमार सिंह
RKTV NEWS/ डॉ विनोद कुमार सिंह,28 जुलाई।गंगा के तट पर बसा अपना प्यारा सा कस्बा बक्सर आदि काल से अपने आध्यात्मिक सौम्य एवं प्रभुत्वशीलता के लिए जाना जाता है। बक्सर से बलिया को नाव से जोड़ने का रामरेखा घाट, देवी अहिल्या के अहिरौली, कतकौली की लड़ाई का मैदान, चौसा और बक्सर का युद्ध यह सब अपने आप में विशिष्ट ऐतिहासिक पहचान रखते हैं।
ऐसी ही आधुनिक बक्सर की औद्योगिक कहानी लिख रहा है, 1320 मेगा वाट की बक्सर ताप विद्युत परियोजना जो केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से बक्सर वासियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी वाणिज्यिक सौगात है।
21वीं शताब्दी के पहले दशक में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी और माननीय ऊर्जा मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव जी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने 1320 मेगा वाट को तीन परियोजनाएं कजरा (लखीसराय), पीरपैंती (भागलपुर) और चौसा (बक्सर) की नींव रखी। प्रथम दो परियोजनाएं तकनीकी कारणों से सौर ऊर्जा में परिवर्तित हो गयी हैं और तीसरी परियोजना 13 20 मेगावाट को फलीभूत करने के लिए केन्द्र सरकार का उपक्रम एसजेवीएन ने वर्ष 2013 में कदम आगे बढ़ाया। 1320 मेगा वाट की बक्सर ताप विद्युत परियोजना को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और माननीय केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री आर. के. सिंह जी के अथक प्रयास से निर्माण कार्य की अनुमति प्राप्त हुई। इस परियोजना को धरातल पर अवतरित करने हेतु एसजेवीएन ने अंतराष्ट्रीय संविदा की प्रक्रिया शुरू की। यह शायद बक्सर की अध्यात्म और प्रभुता का ही प्रभाव था कि इस परियोजना का निर्माण कार्य भी भारत के ही एक प्रबल कंपनी एल. एण्ड टी. को वर्ष 2019 में प्राप्त हुआ।
प्रारंभ के वर्ष में ही इस परियोजना पर भी कोरोना विपदा का असर हुआ जिसका प्रभाव भारत ही नहीं पूरे विश्व पर पड़ा था और देश-विदेश के कई औद्योगिक उपक्रम इसके शिकार भी हुए और बंद हो गए। बक्सर ताप विद्युत परियोजना ने कोरोना के दंश का डटकर मुकाबला किया और कार्य को गति देते रहा, अपितु जब बिहार में भारी परिवहनों से मिट्टी-बालू की ढुलाई पर रोक लगी तब बिहार सरकार ने भी इस परियोजना को ढुलाई की छूट देकर प्रोत्साहित किया तथा समय-समय पर बक्सर ताप विद्युत परियोजना की प्रगति को सराहा।
परियोजना ने भी अपने सामाजिक दायित्व के अंतर्गत एम्बुलेंस सर्विस, ऑक्सीजन प्लांट, सदर अस्पताल में लिफ्ट, मुफ्त मेडिकल हेल्थ वाहन (सत्तलुज संजीवनी), छात्रवृत्ति योजना, आई. टी. आई में एडमिशन, समाज से संबंधित निर्माण कार्य, खेल प्रोत्साहन एवं खेल सामग्री का वितरण, सफाई और सुंदरीकरण का कार्य समय-समय पर किया है। इस परियोजना के कार्य पर कोरोना और छोटी-मोटी समस्या आती रही परंतु परियोजना अपनी प्रगति पर अग्रसर है। इस परियोजना से उत्पन्न होने वाली बिजली का 85 प्रतिशत लाभ स्वयं बिहार राज्य को और यहाँ की जनता जनार्दन को होगा। यह ताप परियोजना बिहार को विद्युत के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा रोजगार की नयी इकाई लगाने में भी प्रोत्साहित करेगी। अभी निर्माण कार्य के दौरान हजारों की संख्या में लोग सीधा रोजगार पा रहे हैं तथा ऐसे ही हजारों लोग दुकान, मकान, सब्जी, राशन तथा अन्य व्यापार के साधन से लाभान्वित है। यह ताप विद्युत परियोजना बक्सर एवं बिहार के युवाओं के लिए रोजगार की एक रोशनी तथा अन्य उद्यम के पनपने का साधन बनता जा रहा है।
निर्माण के दौरान ही चौसा में स्थित ताप परियोजना की जगमगाती रोशनी और 275 मीटर ऊँची चिमनी बक्सर के विकास की कहानी को दर्शा रही है। प्रारंभ के वर्षों में कुछ लोगों को यह संशय था कि इस परियोजना से पर्यावरण को नुकसान होगा लेकिन परियोजना, राज्य एवं केन्द्र सरकार ने इस परियोजना में पर्यावरणीय संबंधी आधुनिकतम तकनीक का प्रावधान किया है और यह माना जाता है कि परियोजना से निकलने वाला धुआं नंगी आंख से दिखाई भी नहीं देगा। इस परियोजना में वातावरण को विशुद्ध करने के लिए बृहद वृक्षारोपण का भी प्रावधान है।
जहाँ तक हमें जानकारी है पिछले कुछ समय से परियोजना के सुचारू रूप से चलने के लिए अति आवश्यक रेल कोरीडोर और वाटर पाइप लाईन की अधिगृहित भूमि पर कार्य बाधित है। परियोजना द्वारा सभी नियमावली को पूरा करके इसका आवश्यक भुगतान उपयुक्त संबंधित कार्यालय को कर दिया गया है। जिसमें सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है। परंतु ये सभी प्रबुद्ध और जानकार लोगों का दायित्व बनता है कि परियोजना के कार्य को बाधित नहीं करे। मुआवजा का मामला जब कोर्ट में है तो यह सदैव ही निष्पक्ष भुगतान को मंजूरी देगा, लेकिन परियोजना में देरी बक्सर के विकास को प्रभावित करेगी और जो हमारे युवा बक्सर में विकास की किरण को देख रहे हैं, वह धूमिल होगा। हमने अपनी आंखों से डालमियानगर को उजड़ते हुऐ देखा है। बक्सर को हमें विकास का भागीदार बनाना है।, डालमियानगर नहीं।
बक्सर को भी इस ताप विद्युत गृह की बदौलत वह ऊँचाई प्राप्त हो जो जमशेदपुर, बोकारो, टाटा आदि शहरों को ऐसे ही उद्योगों की वजह से प्राप्त हुआ ताकि चौसा के आसपास सहित पूरे बक्सर और शाहाबाद के लोगों का जीवन स्तर ऊँचा हो सके।
( लेखक डॉ० विनोद कुमार सिंह, सीनेट सदस्य,वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय है, संपर्क:9431682570, 7992356678)

