
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 जुलाई।वैदिक ग्रन्थों में सभी महीनों का वैशिष्ट्य है किन्तु वर्षा ऋतु के प्रमुख और प्रथम मास श्रावण की महिमा न्यारी है। वेदों में पृथ्वी लोक के देवता के रूप में भगवान शिव का वर्णन किया गया है। विश्व के नाथ की शक्ति का नाम अन्नपूर्णा है। अन्न ही प्राण है, जीवन है। उपनिषदों में अन्न की महिमा और विशेषता का भी भूरिशः वर्णन किया गया है। अन्न के बिना संसार की कल्पना नहीं की जा सकती और वर्षा के बिना अन्न की।
वर्षा से अन्न-जल-प्राण-पर्यावरण सबका पोषण होता है और यह झमाझम वर्षा सावन की प्रसिद्ध है।लोक में सावन की कजरी, प्रकृति की हरियाली और मन में सहज सुख-सुआशा की भावना दिखाई देती है। अध्यात्म में सावन-भादो भक्ति के महीने माने गये हैं–वरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास। राम नाम बर बरन जुग सावन भादो मास।।(रामचरितमानस, बालकाण्ड)।शिवपुराण में श्रावण महीने में भगवान शिव की उपासना का विशद् वर्णन है। भगवान शिव जलधारा से प्रसन्न होते हैं। जल का बीज मंत्र “वं” है जो लोक में अपभ्रंश होकर ” बम ” हो गया है। शिव का अर्थ कल्याण होता है और जलाभिषेक से शिव की उपासना का फल वं के उच्चारण से ही प्राप्त हो जाता है। श्रावण में मासपर्यन्त अनुष्ठान करना, चातुर्मास व्रत का आरम्भ करना, भागवत आदि पुराणों का श्रवण करना, शुभ कार्य करना श्रेयस्कर होता है। संसार के कल्याण के लिए भगवान शिव की सन्निधिऔर श्रावण मास की पवित्रता का सदुपयोग सर्वोत्तम मार्ग है।

