आरा/ भोजपुर (अनिल सिंह),8 मार्च,होली नाम सुनते ही मन मस्तिष्क में मौज मस्ती और नशों में सकारात्मक जोश की अनुबुधुति का अनुभव होने लगता है ।आरा जिले के शाहपुर प्रखंड के गौरा पंचायत में धर्मावति नदी के तट पर स्थित पहरपुर में आज पारंपरिक सद्भाव और सौहार्द के प्रतीक होली पर्व को पारंपरिक और सामाजिक रीति रिवाजों के साथ मिट्टी के कीचड़ और गोबरों के बीच प्राकृतिक रूप से होली को मनाते हुए देखा गया।
। वहां के निवासी शिवयोगी पांडेय ने अपने गांव की परंपरा के बारे में बताते हुए कहा की आज की चका चौंध की दुनिया में जहां लोग भागदौड़ की जिंदगी में अपनी सभ्यता ,सामाजिक संस्कृति को पीछे छोड़ते जा रहे है वही दूसरी ओर ग्रामीण परिवेशों में इसकी जड़ें अभी भी मजबूत है। अपने गांव की होली की जानकारी देते हुए पहरपुर निवासी
शिवयोगी पांडेय ने बताया की होली मनाने की हमारी पुरानी सामाजिक परंपरा आज भी कायम है,उन्होंने बताया की होली के दिन सबसे पहले घर की महिलाएं प्रातः उठ कर स्नान आदि पश्चात होली के पारंपरिक पकवानों , पुआ, पुड़ी,ठेकुआ,दही बड़े को बड़े शौक और श्रद्धा से बनाती हैं और सर्वप्रथम अपने कुल देवी देवताओं की पूजा कर पकवानों का भोग लगाती है,फिर सारे लोगो को खिलाया जाता है।
शिवयोगि पांडेय ने सैकड़ों वर्षों से गांव में घूम घूम कर रंग खेलने वाली टोली के बारे में बताया की इस दिन गांव की टोली जिसमे सभी वर्ग के युवा और वृद्ध शामिल रहते है जो गांव के हर घर चाहे वो किसी भी वर्ग ,समुदाय,अमीर गरीब सभी के दरवाजे पर जाते है और होली की पारंपरिक गीतों के साथ नाचते गाते पुआ पकवान खाते है गांव भ्रमण कर होली का आनंद लेते है,इसी आनंद के क्रम में वो सभी दरवाजे पर जाकर खुशनामा जिसे हम परवी के नाम से ज्यादा जानते है,मांगते है और लोग खुशी खुशी इस परंपरा को निभाते हुए अपनी क्षमतानुसार खुशनामा देते है।
धार्मिक परिपेक्ष्य में कहा की इस दिन गांव के लोग अपनी अपनी गायों को धोकर और उनका पूजन करते है, और संध्या काल में सभी मंदिरों में बारी बारी से फगुआ भी गाते है।


