RKTV NEWS/ शालिनी ओझा,अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च पर नारी शक्ति को समर्पित शालिनी की कविता।
नारी सृष्टि का आधार है
उसके जीवन से ही गेह में बहार है…
प्रेम ,दया,ममता का हैं ये अनूठा संगम
आज भी कहीं कहीं इनको सम्मान की दरकार है।
भीरू होती हैं बेटियां
कहता है समाज
अंतरिक्ष से खेत तलक
वो कहां नहीं है आज।
घर के चूल्हा चौका से भी
मुंह नहीं है मोड़ा
समाज के मिथक सोच का
भ्रम उन्होंने तोड़ा।
नन्हा पौधा बरसो बाद
अगर तरु है बनता
सोचो जरा.. वो अगम क्या
दूसरी मिट्टी में फलता।
पर नारी ही है जो
नन्ही बिरवा से बिटप कहीं है बनती
और दूसरे आंगन में
जा कर भी फलती फूलती।
त्याग अपने संगी साथी
दूसरा कुटुंब अपनाती
मन तो उसका छलनी होता
पर ऊपर से मुस्काती।
जननी, भगिनी, दारा, सुता का
फर्ज सदा ही निभाती
खतरा मंडराता जो अपनों पर
तो वह चंडी भी बन जाती।
बहुत कुछ अब बदल चुका है
बदल चुका है जमाना
नंदन ,नंदिनी मे भेद नहीं
ज्ञानी अज्ञानी सभी ने माना।


