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झामुमो के प्रेस वार्ता पर भाजपा का पलटवार।

सीता सोरेन के लिए हमदर्दी का सिर्फ नाटक,असली हमदर्दी होती तो स्व दुर्गा सोरेन के संदेहास्पद मौत की उच्च स्तरीय जांच होती : प्रतुल शाहदेव

लोकसभा चुनाव के परिणाम से सत्ताधारी गठबंधन बदहवास, भाजपा गठबंधन 50 विधानसभा सीटों पर आगे था जबकि सत्ताधारी गठबंधन 29 सीटों पर सिमटा

झामुमो कांग्रेस की समीक्षा बैठकों को भूल गई जिसमें दिनदहाड़े गोलियां चला करती थी

रांची/झारखंड (डॉ अजय ओझा, वरिष्ठ पत्रकार) 18 जून।भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रेस वार्ता पर पलटवार करते हुए कहा कि आज यह लोग सीता सोरेन के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जिस समय सीता सोरेन ने सोरेन परिवार के ऊपर उनकी और उनकी बेटियों की उपेक्षा का आरोप लगाया था तो झामुमो चुप रही। सीता सोरेन ने अपने आंदोलनकारी पति स्व दुर्गा सोरेन की मौत को संदेहास्पद बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी तो झारखंड मुक्ति मोर्चा को सांप सूंघ गया था।आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रतुल ने कहा कि जब सत्ताधारी गठबंधन के प्रथम परिवार के भीतर मां समान बड़ी बहू की अपेक्षा की गई हो तो इन से आम लोगों के लिए न्याय की उम्मीद की बात सोचना भी बेमानी है। वैसे अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा आरोपों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है तो उसे अपने ही गठबंधन के विधायक लोबीन हेंब्रम,चमरा लिंडा ,अंबा प्रसाद, इरफान अंसारी, दीपिका पांडे सिंह के द्वारा अलग-अलग समय पर सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों का भी प्रेस कांफ्रेंस कर जवाब देना चाहिए।
प्रतुल ने कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद सत्ताधारी गठबंधन बदहवास हो गया है।जिस समय 2019 में इन लोगों ने चुनाव जीता था तब इनके पास 48 विधायक थे एवं तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन था। इस लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन 50 सीटों पर आगे रहा जबकि इंडी गठबंधन सिर्फ 29 सीटों पर सिमट गया। इन्हें पता है कि अगले चुनाव में इनका सुपड़ा साफ होने वाला है। इसलिए यह अनर्गल बयान बाजी पर उतर आए हैं।
प्रतुल ने कहा कि भाजपा की समीक्षा बैठक पूरे प्रदेश में चल रही है।अधिकांश जगहों पर कार्यकर्ता सुचारू रूप से फीडबैक दे रहे हैं।सिर्फ देवघर में कुछ बाहरी तत्वों के द्वारा हंगामा करने की सूचना आई थी।यह पूरा मुद्दा प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में है।
प्रतुल ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को जरा अपने सहयोगी दल कांग्रेस का झारखंड में भी ट्रैक रिकॉर्ड देख लेना चाहिए। 21 जून, 2013 को कांग्रेस भवन, रांची में दो गुटों के बीच में वर्चस्व की लड़ाई पर दिन दहाड़े दर्जनों राउंड गोलियां चली थी और पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया था। 1 जुलाई, 2019 को लोक सभा की हार की समीक्षा बैठक के दौरान तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार को कांग्रेस कार्यालय में घुसने तक नहीं दिया गया और पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा था। कांग्रेस ऑफिस पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।उस समय भी कई लोग हिरासत में लिए गए थे। प्रतुल ने कहा झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने ही गठबंधन के तीन विधायकों के ऊपर मुकदमे करा कर कोलकाता में उनकी गिरफ्तारी भी करवाई थी। लंबे समय तक उनको जेल में यातना भी दिलवाया था।प्रतुल ने कहा जाहिर तौर पर भ्रष्टाचार, वादा खिलाफी, बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न, आदि के मामलों में चौतरफा घिरी झारखंड मुक्ति मोर्चा ध्यान भटकाने के लिए नया नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है।

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