आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 जून। सोमवार को स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र में नई आशा के तहत इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों के साथ पर्यावरण को समर्पित एक गोष्टी आयोजित की गई। गोष्टी को संबोधित करते हुए वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ पीके द्विवेदी ने कहा कि पर्यावरण को संतुलित करने के लिए केवल पेड़ लगाना ही अब पर्याप्त नहीं होगा बल्कि मानव निर्मित कई प्रदूषण कारकों को कम करना होगा। डॉ द्विवेदी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 100 वर्षों में तापमान में जितनी वृद्धि नहीं हुई थी उतना पिछले 50 सालों में हुई है। आने वाले 50 साल में 2 से 3 डिग्री तापमान में वृद्धि संभव है। इसके लिए तेजी से वृक्ष लगाना, भूक्षरण माइक्रो लेवल पर रोकना एवं मिट्टी को साफ रखना आदि अत्यावश्यक है।
उन्होंने कहा कि खेतों में सिंचाई सहित अन्य कार्यों के लिए तेजी से पानी का उपयोग और दुरुपयोग हो रहा है लेकिन जल संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं हो रही है।आज प्रति वर्ष 15 से 50 सेंटीमीटर पानी नीचे भाग रहा है। नदी का पेट भूक्षरण से भरता जा रहा है।डॉ द्विवेदी ने कहा कि जिस पॉलीथिन और थर्मोकोल का हम इस्तेमाल कर रहे हैं, उसके परिवर्तित होने में 100 से 500 वर्ष तक लग जाते हैं। मिट्टी अब मुलायम नहीं रही। मिट्टी के नीचे पॉलिथीन का परत बनता जा रहा है जिसके कारण मिट्टी का जल सोखने की क्षमता समाप्त हो रही है। मौके पर डॉ भीम सिंह भवेश, रामनाथ ठाकुर, मोनी सिन्हा, माधव जी, सत्यम केशरी, धीरज कुमार, अर्पित कुमार,उदित कुमार,उज्ज्वल कुमार, आदिल परवेज, सचिन कुमार, आदित्य राज आदि थे।
