आरा /भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)28 मई। सोमवार को श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ बड़ी नहर किनारे अवस्थित कला घुसिया के अन्तर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर पूज्य जीयर स्वामी जी के कृपापात्र जगद्गुरु रामानुजाचार्य विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को सच्ची और अच्छी मित्रता की संज्ञा दी। सुदामा कृष्ण की मिलन की कथा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने माहौल को कारूणिक बना दिया, भक्तों की आंखें गीली हो गई ।आचार्य धर्मेन्द्र ने कहा कि दोस्ती करना और दोस्ती निभाना कृष्ण सुदामा से सिखना चाहिए। मित्र वैसा जो बिना बोले उसके अभाव को जान जाय और दूसरा मित्र जो बिना मांगे सब कुछ दे दे।ये है मित्रता।यहीं है कृष्ण सुदामा की मित्रता।
आचार्य जी ने प्रभाष क्षेत्र में उद्धव और द्वारकाधीश संवाद को कहते हुए दातात्रेय द्वारा चौबीस गुरूओ के संदेश को समास शैली में प्रस्तुत किया। द्वादश स्कन्ध की कथा कहते हुए धर्म, अधर्म,पाप,पूण्य और कलयूग के राजाओं का वर्णन करते हुए मार्कण्डेय चरित्र को कहते हुए कथा की पूर्णाहुति करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा का सार है – (1)हर हालत में प्रसन्न रहना और (2) ईश्वर के प्रति प्रपन्न रहना ।
