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बिहार : जेल भेजने की धमकी देकर प्रधानमंत्री संविधान की धज्जियाॅ उड़ा रहे : तेजस्वी यादव 

पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 27 मई। बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री उनको जेल भेजने की धमकी देकर संविधान की धज्जियाॅ उड़ा रहे हैं। पत्रांक 18 दिनांक 26/5/24 को प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में तेजस्वी प्रसाद यादव ने लिखा है कि चुनावी मौसम में ही आप बिहार आते हैं। फिर आप बिहार आये और एक बार फिर अपने सभी लोगों को भ्रमित करने की असफल कोशिश की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी, आपको याद होगा कि बिहार से हम सब अगस्त 2021 में आपके पास जातिगत जनगणना की मांग को लेकर आये थे और आदरणीय नीतीश जी की जदयू समेत और भी दल मेरी इस मांग के पक्ष में थे। जातिगत जनगणना का प्रस्ताव मेरी ही पहल पर सर्वसम्मति से बिहार विधान सभा में पास कराया गया। हम सभी ने मिलकर आपसे जातिगत जनगणना की मांग की थी लेकिन आपने एकदम हमारी यह मांग ठुकरा दी थी। हम सबको आपकी संवेदनशून्यता से पीड़ा हुई।
पत्र में तेजस्वी यादव ने लिखा है कि जब हम बिहार में सरकार में आये तो हमने सरकार में आते ही राज्य के खर्चे पर जातिगत सर्वेक्षण कराया। उसकी हकीकत से आपको भी अवगत कराया गया। हमने उस सर्वेक्षण के आलोक में आरक्षण का दायरा 75% तक बढ़ाया और आपसे बार-बार गुजारिश करते रहे तथा हाथ जोड़कर मांग करते रहे कि इसको संविधान की नौंवी अनुसूची में डालिए। लेकिन प्रधानमंत्री जी, आप मूलतः पिछड़ा और दलित विरोधी मानसिकता के हैं। आपने हमारी इस महत्वपूर्ण आग्रह, जिसके पक्ष में बहुजन स्वर था, पर कोई विचार नहीं किया। 10 दिसंबर 2023 को पटना में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री से भी इसकी मांग की गई थी।
तेजस्वी यादव ने लिखा है कि आप बिहार आये और यहाँ आ करके आप जितनी कुछ आधारहीन, तथ्यहीन और झूठी बातें कर सकते थे, आपने की। अब आपसे अपेक्षा नहीं है कि आप अपने पद की गरिमा का ख्याल रख विमर्श को ऊंचा रखेंगे। लेकिन आप “भैंस”, “मंगलसूत्र” के रास्ते होते हुए “मुजरा” तक शब्दावली पर आ गये। इस विशाल हृदय वाले देश के प्रधानमंत्री जी की भाषा ऐसी नहीं होनी चाहिए।
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री को लिखा है कि अपने बाबा साहेब का आरक्षण खत्म करने का एक नायाब तरीका ढूंढा है। संविधान की धारा 15 और धारा 16 के तहत आरक्षण सरकारी नौकरियों में मिलता है। आपने रेलवे, सेना और अन्य विभागों से सरकारी नौकरियां ही खत्म कर दीं तो आरक्षण की अवधारणा कहाँ जायेगी। ये गंभीर चिंता आपकी प्राथमिकताओं में है ही नहीं। हम तो संसद में, सड़क पर, सदन में आपसे कई बार आग्रह कर चुके हैं कि आप प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की व्यवस्था करिए ताकि व्यापक बहुजन आबादी, दलित समुदाय और अन्य वंचित समूहों को उनका वाजिब संवैधानिक हक मिल सके।
उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री जी, 5 किलो राशन को भी आप मुफ्त कहते रहते हैं। यह तो हमारे देश के नागरिकों का संविधान प्रदत्त न्यूनतम अधिकार है। आपकी भाषा और भाव मूलत: गरीब विरोधी है। मैं आपसे लगातार नौकरी, आर्थिक-सामाजिक न्याय, महंगाई और बिहार को विशेष राज्य पर सवाल करता रहा हूँ लेकिन आपकी रहस्यमयी चुप्पी समस्त बिहारवासियों को हताश कर रही है।
अब चुनाव का एक ही चरण बचा है। हमारी जो भी मांग है आरक्षण को लेकर, संविधान को लेकर और आर्थिक सामाजिक न्याय के संदर्भ में उन सब पर आप गौर फरमाते हुए अपनी प्रतिक्रिया दें। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखा है कि आप सीधे तौर पर कहिए कि आप अपने प्रेरणा स्रोत गुरु गोलवरकर जी की “बंच ऑफ थॉट्स” किताब से सहमत नहीं हैं। क्या आप कह पायेंगे। यह भी कह दीजिए कि आप पिछड़े, अत्यंत पिछड़े, दलित, तमाम वर्गों को उनका समुचित आरक्षण प्राइवेट सेक्टर में भी देने की मांग से सहमत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर आपसे यह सब नहीं कहते बन रहा है तो जनता समझ लेगी कि आपकी चुनावी भाषणों का गिरता पैमाना ही आपकी राजनीतिक सोच का सही प्रतिबिंब है। 1990 में जब मंडल कमीशन लागू हुआ था तब मंडल कमीशन के विरोध में आप आडवाणी जी के साथ आरक्षण विरोधी रथ के सारथी थे। इस बात को बहुजन दलित समुदाय कैसे भूल सकता है।
समस्त दलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और आदिवासी जानते हैं कि बीजेपी और आप बाबा साहेब, बिरसा मुंडा, मान्यवर कांशीराम, लोहिया जी और मंडल कमीशन के कट्टर वैचारिक दुश्मन हैं। इस पत्र के साथ मैं गुजरात में ओबीसी कैटेगरी के अंतर्गत मुस्लिम जातियों की सूची भी संलग्न कर रहा हूँ। शायद आपको ज्ञान और ध्यान भी न रहा हो कि गुजरात में मुस्लिम समुदाय की जातियों को भी आरक्षण मिलता है। आप 13 वर्ष से ज्यादा अरसे तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं। अतः भ्रम फैलाने और नफरत परोसने की राजनीतिक से परहेज करिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने की बजाय आप युवाओं को नौकरी दिलाने के लिए संघर्षशील एक 34 साल के युवा तेजस्वी को जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं। क्या ऐसी धमकी देकर आप संविधान की धज्जियाॅ नहीं उड़ा रहे हैं। चुनाव आयेंगे और जायेंगे। लेकिन संविधान, देश की सामाजिक संरचना और इसकी बनावट पर अब और आघात मत कीजिये।

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