आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 मई। बुधवार को बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब) ने उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों का वेतन शिक्षा विभाग द्वारा सीधे उनके खातों में भेजे जाने के सरकार के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो के बी सिन्हा ने कहा कि वगैर व्यापक विचार विमर्श के अचानक एक नई व्यवस्था लागू करना सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है।
फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा एवं महासचिव संजय कुमार सिंह, विधान पार्षद, ने आरोप लगाया कि सरकार का यह एक नया शगूफा है जिसकी आड़ में शिक्षा विभाग पटना उच्च न्यायालय के 17 मई के उस आदेश से ध्यान भटकाना चाहती है जिसके द्वारा सरकार को निर्देश दिया गया है कि 10 दिनों अर्थात 27 मई तक वर्ष 2023-24 के स्वीकृत बजट के बकाया अनुदान को विमुक्त कर दें अन्यथा एसीएस सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों के वेतन पर रोक रहेगा।
बकाया अनुदान रोकने से कई विश्वविद्यालयों में जनवरी-फरवरी से वेतन पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है। सरकार ने इस संबंध में चुप्पी साध रखी है जिससे लगता है कि विभाग अभी भी प्रताड़ना की भावना से बाहर नहीं निकला है।
शिक्षा विभाग से सीधे भुगतान की व्यवस्था अधिनियम की धारा 46 का उल्लघंन है। प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय के सीनेट, सिंडिकेट से स्वीकृत बजट अनुसार राज्य की संचित निधि से अनुदान विमुक्त करेगी तथा उसका अंकेक्षण नियमित रुप से करा सकेगी।
सरकार ने जानबूझकर पुरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा है ताकि प्रश्न नहीं पूछा जाए कि यह व्यवस्था क्या राज्य सरकार के कर्मचारियों की तरह भुगतान सुनिश्चित करता है?
उन्होंने ने कहा कि यह व्यवस्था सुधारात्मक नहीं होकर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता की ताबूत में अंतिम कील की तरह होगा।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक ज्ञापन कुलाधिपति, शिक्षा मंत्री एवं उपाध्यक्ष बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद को भेजा जा रहा है।
