
शाहपुर/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 4 जनवरी। सेना के हवलदार हरेंद्र सिंह का शव उनके पैतृक गाँव भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के सरना पहुँचते ही माहौल गमगीन हो गया।

ग्रामीणों की ऑंखें नम हो गईं। वहीं पत्नी रिंकी देवी, माता जानकी देवी, पुत्री मानसी कुमारी (15 वर्ष), रीता कुमारी उर्फ मानकी (13 वर्ष) और पुत्र निखिल कुमार (17 वर्ष) का रोते-रोते बुरा हाल था। पिता अवकाश प्राप्त सैनिक सत्येंद्र नारायण सिंह को क्या पता था कि उनको अपने ज्येष्ठ पुत्र की अर्थी उठानी पड़ेगी। पिता की अर्थी पुत्र के कंधे पर होनी चाहिए।
पर कालचक्र के क्रूर संयोग ने पिता को ही पुत्र की की अर्थी का कंधा देने पर मजबूर कर दिया। सरना निवासी भूतपूर्व सैनिक सत्येंद्र नारायण सिंह के ज्येष्ठ पुत्र हरेन्द्र सिंह जोधपुर में मेडिकल कोर में हवलदार के पद पर कार्यरत थे। 23 दिसंबर 2024 को जोधपुर में बाथरूम में हरेंद्र सिंह को हार्ट अटैक आया। 25 दिसंबर को उनको बेहतर चिकित्सा हेतू पुणे आर्मी हॉस्पिटल में भेज दिया गया। 31 दिसंबर 2024 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका शव 3 जनवरी को उनके पैतृक गाँव सरना पहुँचा। शव पहुॅचते ही माहौल गमगीन हो गया।

उनके शव का दर्शन करने के लिए लोगों का हुजूम उनके घर उमङ पड़ा। लोगों ने नम ऑखों से उन्हें विदाई दी। विधायक राहुल तिवारी उर्फ मंटू तिवारी, मुखिया बीरबल सिंह, बीडीओ शत्रुंजय कुमार सिंह, शाहपुर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर कुमार रजनीकांत, करनामेपुर थाना सहित बङी संख्या में लोगों ने उनके घर पर जाकर हवलदार हरेन्द्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका अंतिम संस्कार बिहार घाट पर किया गया।

विधायक राहुल तिवारी उर्फ मंटू तिवारी भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। हरेंद्र सिंह चार भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके भाई-बहनों मे भाई चंदन सिंह, शशि भूषण सिंह, संजीव सिंह तथा बहन खुशबू देवी शामिल हैं। उनको गार्ड ऑफ ऑनर और बंदूक की सलामी देकर अंतिम विदाई दी गई। यह भी एक संयोग है कि जन्मदिन के दिन ही उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनका जन्म 3 जनवरी 1983 को हुआ था। सेना में उनकी भर्ती 3 जनवरी 2005 को हुई थी। विधि का विधान ऐसा है कि उनकी अंत्येष्टि भी 3 जनवरी 2025 को हुई। 
