आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)18 मई।कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के हेड डॉक्टर प्रवीण कुमार द्विवेदी ने जानकारी दिया कि भोजपुर में इस कार्यक्रम को नए क्षेत्रों में जोड़ने के लिए एक पहल की जा रही है और इसी क्रम में कुल्हड़िया गांव का चयन इस कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया। इस गांव में अपार संभावनाएं हैं और खासकर के मोटे अनाजों के लिए यहां के किसानों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है पिछले वर्ष भी इस गांव में बाजरे का प्रशिक्षण किया गया था और उसके बड़े ही उत्साहवर्धक नतीजे आए और अब इस गांव का पूरी तौर पर कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा अपने कार्यक्रमों से जोड़कर किसानों को नई तकनीक से अवगत कराना है और उनके खेतों में इसका प्रशिक्षण किया जाएगा। किसानों को नवीन तकनीक की जानकारी देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक शशि भूषण कुमार शशि एवं कृषि अभियंत्रण के विशेषज्ञ अंकित उपाध्याय की टीम ने गांव में किसानों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया इस प्रशिक्षण के क्रम में लगभग 65 से ज्यादा किसानों ने भाग लिया एवं स्थानीय पैक्स के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह भी उपस्थित थे।
किसानों को बेड के ऊपर पंक्तियों में बाजड़ा लगाने की तकनीक बताते हुए जानकारी दिया गया के बेड पर लगाने से फसलों की गिरने की संभावना कम हो जाती है इसके साथ ही कभी-कभी अत्यधिक वर्षा होने पर पौधे के ऊपर जल जमाव का विपरीत प्रभाव नहीं होता है इसके अतिरिक्त पौधों की जड़ों में पर्याप्त नमी एवं हवा का प्रवाह होने से पौधे का समुचित विकास भी होता है एवं पौध ज्यादा से ज्यादा भोजन ग्रहण करने में सक्षम होते हैं इसके परिणाम यह होते हैं कि आपकी फसल का जो उत्पादन है वह काफी अच्छा हो जाता है और शुद्ध लाभ भी बढ़ जाता है। आने वाले समय में इस गांव में कम अवधि के धान बाजार मक्का फसलों का प्रत्यक्षण किसानों के खेत में केवीके के माध्यम से कराया जाएगा जिसमें पूरी तरह से किसानों की सहभागिता होगी एवं किसानों के खेत में नवीन तकनीकों का प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन किया जाएगा। अंकित उपाध्याय ने किसानों को बताया कि आप बहुत अच्छी-अच्छी मशीन आ गई है जिनके द्वारा बेड बनाना बहुत आसान हो गया है अब बहुत ज्यादा मानव श्रम की आवश्यकता नहीं है और आप मशीनों से बहुत आसानी से बेड भी बना लेते हैं और मशीनों के माध्यम से इसकी कतार में बुवाई भी बहुत अच्छी तरह से हो जाती है आवश्यकता होने पर मशीनों के द्वारा दावों का भी छिड़काव बहुत कम समय में इस तरह की फसलों पर किया जा सकता है ऑस्टिन 14 से 15 मिनट में एक एकड़ खेत की खरपतवार नियंत्रण की दवा का छिड़काव किया जा सकता है कार्यक्रम की बात किसानों के बीच में काफी उत्साह देखा गया। आशा है कि एक प्रमुख केंद्र के रूप में श्रीअन्न को नए कलेवर के साथ कोईलवर के किसान इस जिले के लोगों को विविध प्रसंस्कृत उत्पादो के रूप में उपलब्ध कराने में सफल होंगे।

