महाशिवरात्रि पर शिवबारात में शामिल हुए देवघरवासी।

नंदी पर सवार हो निकले नीलकंठ।

शिव के बारात में देवता और दानव सभी बने बाराती।

पर्यटन विभाग द्वारा निकाली गई झांकियों से पटी रहीं सड़कें।

उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने शिव बारात को किया रवाना।

रावण ने की शिव की तपस्या।

कृष्ण की बांसुरी धुन पर मोहित हुई गोपियां।

वीणावादीनी के भव्य स्वरूप के हुए दर्शन।

मां काली ने दिखाया अपना रौद्ररूप।

यम दरबार में हुआ कर्मों का लेखा जोखा।

साइबर दैत्य बना आकर्षण का केंद्र।

राम दरबार में हनुमान ने किया राम नाम का जाप।

झांकी द्वारा प्रदर्शित की गई महिला सशक्तिकरण की सफलता।

भारत माता ने दिया राष्ट्र एकता का संदेश।

भगवान शिव समावेशिता और समानता के है प्रतीक : नमन प्रियेश लकड़ा
RKTV NEWS/देवघर (झारखंड)16 फरवरी।महाशिवरात्रि के अवसर पर पर्यटन विभाग द्वारा के.के.स्टेडियम से निकाली जाने वाली शिव बारात को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा, पुलिस अधीक्षक सौरभ एवं उपस्थित अतिथियों ने सयुंक्त रूप से रवाना किया। इस दौरान उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, नगर आयुक्त रोहित सिन्हा, अपर समाहर्ता हीरा कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी शैलश प्रियदर्शी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी राहुल कुमार भारती, जिला खेल पदाधिकारी संतोष कुमार एवं संबंधित अधिकारी आदि उपस्थित थे।
इसके अलावा उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा ने सभी का स्वागत करते हुए महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दी। आगे उन्होंने कहा कि आज का यह पावन अवसर अत्यंत विशेष है, क्योंकि अभी कुछ ही देर में के.के.एन स्टेडियम से भव्य शिव बारात का शुभारंभ होने जा रहा है।
शिव बारात केवल एक धार्मिक शोभायात्रा नहीं, बल्कि हमारी लोक-परंपरा, सांस्कृतिक उत्साह और सामूहिक आस्था का जीवंत स्वरूप है। आगे उन्होंने कहा भगवान शिव की बारात अद्भुत मानी जाती है, इसमें देव, दानव, योगी सभी सम्मिलित होते हैं।
यह हमें यह संदेश देती है कि महादेव सबको स्वीकार करते हैं। उनके द्वार पर कोई भेदभाव नहीं है — न जाति का, न वर्ग का, न स्थिति का। शिव समावेशिता और समानता के प्रतीक हैं। आज स्टेडियम से निकलने वाली यह शिव बारात पूरे नगर में उत्साह और भक्ति का संचार करेगी। मैं सभी श्रद्धालुओं से आग्रह करता हूँ कि शोभायात्रा के दौरान अनुशासन, शांति और स्वच्छता बनाए रखें तथा प्रशासन और आयोजन समिति का सहयोग करें। साथ ही देर संध्या में मंदिर परिसर में मुख्य कार्यक्रम एवं शिव-पार्वती विवाह समारोह का आयोजन होगा। शिव विवाह हमें यह सिखाता है कि तप और शक्ति, संयम और समर्पण, प्रकृति और मानव का संतुलन ही सृष्टि का आधार है। यह विवाह केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन और सामंजस्य का प्रतीक है।

