श्रीअन्न (मोटे) अनाजों की भूमिका से स्वास्थ्य बजट में बड़ी राहत होगी:डा पी के द्विवेदी ,हेड कृषि विज्ञान केंद्र
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)15 मई।कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर आरा एवं आत्मा भोजपुर के संयुक्त तत्वावधान में श्री अन्न उत्पादन प्रसंस्करण एवं विपणन विषय पर उदवंत नगर प्रखंड परिसर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ प्रवीण कुमार द्विवेदी हेड केवीके भोजपुर सुप्रिया वर्मा वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर, प्रखंड कृषि पदाधिकारी शंभू शरण , कृषि समन्वयक रणविजय सिंह, विजेंद्र कुमार शैलेश कुमार तथा कृषि तकनीकी प्रबंधक मनी बाला कुमारी के साथ ही उपस्थित महिला एवं पुरुष कृषकों ने संयुक्त रूप से किया।
कृषि समन्वयक रणविजय जी ने जानकारी दी की विभाग के द्वारा जिले में अरहर के साथ ज्वार अकाल फसल के रूप में मड़वा चीना की की खेती को बढ़ावा देने के लिए वृहद स्तर पर कृषि विभाग के द्वारा प्रत्यक्षण एवं प्रशिक्षण का कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। इसी क्रम में यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रखंड के प्रगतिशील कृषकों के लिए आयोजित किया गया है।
श्रीमती वर्मा ने जानकारी दी कि आज पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन हो रहा है और इसकी मुख्य वजह अपने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करना है और इसके बदले में हम सभी लोग ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रफल में धान गेहूं फसल प्रणाली को अपना रहे हैं और यह हमारा मुख्य आहार भी बन चुका है जिसके कारण शरीर में बहुत सारे पोषक तत्वों की कमी हो रही है ।फलस्वरूप उच्च रक्तचाप शरीर के विभिन्न हिस्सों में पत्थर का निर्माण घुटनों में दर्द हृदय संबंधित परेशानियां एवं शरीर में उच्च शर्करा मधुमेह जैसी समस्याएं धीरे-धीरे एक बहुत बड़ी आबादी को प्रभावित कर रही है इसके साथ ही बच्चों एवं पुरुषों महिलाओं का शारीरिक विकास पूर्व की तुलना में काम हो रहा है और विशेष तौर पर महिलाएं ज्यादा कुपोषण का शिकार हो रही है।
डॉक्टर द्विवेदी ने बताया कि आज देश में आम आदमी अपने आमदनी का लगभग 38% स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय कर रहा है अगर इसमें हम कमी कर सकें तो हम एक बहुत बड़ी बचत अपने भविष्य के लिए कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के द्वारा श्रीअन्न अर्थात मोटे अनाजों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए कई वर्षों से इसके बारे में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और वर्ष 2023 भारतवर्ष के पहल पर अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में पूरे विश्व में मनाया गया। देश के सभी गणमान्य चिकित्सकों के द्वारा आज इसको अपने भोजन में शामिल करने की अनुशंसा की जा रही है आने वाले समय में इसे मध्यान भोजन में भी शामिल किया जाएगा। भोजपुर जिले में ज्वार बाजरा रागी अर्थात मड़ुवा चीना कोदो के लिए काफी अनुकूल जलवायु है। इनकी खेती करने के लिए सामान्य से लेकर कम उर्वरा शक्ति वाले खेत काफी अनुकूल है । जहां पानी की काफी कम मात्रा उपलब्ध है वहां पर भी इनकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। इनमें उर्वरकों का भी बहुत कम प्रयोग होता है तथा यह कम दिन की फसल होती है । अतः खेत जल्दी खाली होने के कारण अगली फसल लगाने में किसी प्रकार का विलंब नहीं होता है। अगर ज्वार को अरहर के साथ लगाया जाता है तो अरहर की कई बीमारियों का भी ज्वार के कारण प्राकृतिक रूप से नियंत्रण हो जाता है।
इनकी अंदर कई प्रकार के पोषक तत्व विशेष रूप से कैल्शियम जिंक लोहा विटामिन रेशा तथा वर्षा की उपलब्धता के साथ ही उच्च गुणवत्ता युक्त प्रोटीन भी पाया जाता है जिसके कारण शरीर में उत्पन्न होने वाले कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधित समस्याएं तथा मधुमेह के प्रबंधन में काफी सहयोग मिलता है अतः आवश्यकता है कि इसकी खेती पहले छोटे स्तर पर और फिर बाद में जैसे-जैसे इसके लिए बाजार उपलब्ध होता जाए बृहद स्तर पर करके ज्यादा लाभ लिया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन मनी बाला कुमारी एवं धन्यवाद ज्ञापन विजेंद्र कुमार ने किया।


श्रीअन्न (मोटे) अनाजों की भूमिका से स्वास्थ्य बजट में बड़ी राहत होगी:डा पी के द्विवेदी ,हेड कृषि विज्ञान केंद्र