आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 24 अगस्त।कृषि विज्ञान केन्द्र के नवीन प्रक्षेत्र सकडी कोईलवर में किसानों के लिए एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जोअंतर्राष्ट्रीय संस्थान ईफ्री संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, हार्वेस्ट प्लस बिहार,उड़ीसा एवं कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र के हेड डा प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया की वर्तमान जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में तकनीक एवं फसल प्रणालियों में हो रहे परिवर्तन तथा भोजन में पोषक तत्वों की भूमिका के ऊपर किसानों के विचार एवं आने वाले समय में अनुसंधान कार्यों में किसानो की सहभागिता से कार्यक्रम की रूपरेखा तय करना है।
विशिष्ट अतिथि डा सुरेश बाबू, वरिष्ठ वैज्ञानिक इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च सिस्टम, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ डॉ वीरेंद्र मेंडाली वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक हार्वेस्ट प्लस बिहार एवं उड़ीसा राज्य तथा डॉक्टर रविंद्र गिरी, कार्यक्रम प्रबंधक बिहार के साथ ही रोहित रंजन सामुदायिक विकास पदाधिकारी हार्वेस्ट प्लस उपस्थित थे।
डॉ सुरेश बाबू ने जानकारी दी कि इनका अंतरराष्ट्रीय संस्थान पूरे विश्व में विभिन्न देशों में वहां के नीति निर्धारक संस्थाओं के साथ मिलकर खेती के बेहतर प्रबंधन एवं कुपोषण उन्मूलन पर कार्यक्रम कर रहा है। भारत वर्ष में भी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली, कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विभाग के साथ मिलकर इसी दिशा में कार्य करना प्रारंभ कर चुका है। इसमें उनकी सहयोगी संस्थान हार्वेस्ट प्लस की भी महत्वपूर्ण भूमिका है
डॉ वीरेंद्र ने अपने विचार रखते हुए बताया कि आज पूरे विश्व में डिजिटल क्रांति चल रही है और सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं का निरंतर प्रवाह जारी है पूरे बिहार में 2 लाख से ज्यादा किसान पौष्टिकता से युक्त अनाजों एवं अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं और इनका बाजार भी धीरे-धीरे विकसित हो रहा है। डॉ रविंद्र गिरी ने जानकारी दी कि आज धान गेहूं के अतिरिक्त मक्का बाजरा रागी के नवीन प्रभेद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के द्वारा विकसित किया जा रहे हैं और भारतवर्ष में भी विभिन्न विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थानों के द्वारा इनका जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम तथा जीविका दीदी के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए रोहित रंजन ने जानकारी दी कि यहां पर इस वर्ष अभी खरीफ के मौसम में मक्का धान बाजरा एवं रागी का प्रत्यक्षण किया गया है जिसके परिक्षेत्र का भी भ्रमण टीम के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने पिछले वर्ष उत्पादित चावल बाजरा एवं गेहूं के बारे में बताया कि इसके उत्पाद का वे सभी अपने दैनिक भोजन के रूप में उपयोग कर रहे हैं। संजीव कुमार सिंह जलपुरा,अजब नारायण सिंह मोहकमपुर,आदित्य सिंह खेसरहिया , पंचानंद सिंह डुमरिया ,अभिमन्यु कुमार सिंह देवरिया, रतन कुमार बिक्रमगंज अमित कुमार सिंह देवरिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए जानकारी दी कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरुआत के बाद उत्पादकता में 30 से 35% तथा वार्षिक आय में तीस से चालीस हजार रूपयो की वृद्धि हुई है। अंकित कुमार उपाध्याय तकनीकी सहायक सिआरए कार्यक्रम ने जानकारी दी
पूर्व में जहां दो ही फसल खेतों में लगा रहे थे वहां पर 3 से 4 फसले लगाई जा रही है।
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