
उसे भूल जाना ही बेहतर होगा!
जब ये ज़िस्म जर्ज़र
आँखें कमजोर
हो जायेगी
निकलेंगे ना कोई शब्द
ना सुनाई देगा कोई बोल
तब तुम दुनियाँ को बताना
एक कवि/शायर का किस्सा
फिर एक दास्तां सुनाना
जो लिखता था हर लफ्ज़ में
तुम्हारे खूबसूरती के किस्से l
तुम ज़माने को बताना
कि कैसे चंद लम्हों की
मुलाक़ात के बाद
एक लम्बी जुदाई
साथ आई थी और
कहानी-कविता औऱ शायरी ही
बातों का बहाना बन गई थी l
तुम वो सारी बातें बताना
जो तुम्हारे और कवि/शायर के
दरमियाँ गुजरे है पर य़ह मत बताना
कि वो कवि/शायर तुम्हारा दीवाना था।
नाम क्या था कोई पूछे तो
कह देना वो एक अजनबी था
जो खुशबु की तरह जिन्दगी में
आया और खुशबु बिखरते हुए
दूर/वापस चला गया।
शायद वो जिन्दगी का
एक सुनहरा दौर था जिसे अब
भूल जाना ही बेहतर होगा।


