
बिना बुलाये आ जाना!
हर्षित -सुरभित पंखुड़ियों में,
नव पल्लव पुष्पित कलियों में I
बन,बाग,तड़ाग, सरोवर -सरिता,
उर आनन में हंस कर आना I
अगले बरस बसंत ऋतु लेकर,
बिना बुलाये आ जाना II1II
तोता,मैना – पपिहा की टोली,
मधु से मधुकर भर लें झोली I
मोर – मोरनी झूम के नाचें,
मन उपवन को सरस बनाना I
अगले बरस बसंत ऋतु लेकर,
बिना बुलाये आ जाना II2II
बागों में सुरभित हरियाली,
कोयल बोले आम की डाली I
धरती से अम्बर तक लेकर,
सुंदर धानी चुनर बिछाना I
अगले बरस बसंत ऋतु लेकर,
बिना बुलाये आ जाना II3II
फिर से रंग गुलाल लगेगा,
बोधई – जुम्मन में प्यार बढ़ेगा I
परदेशी *नरेश* से कहना,
होली पर घर जरूर आना I
अगले बरस बसंत ऋतु लेकर,
बिना बुलाये आ जानाII4II


