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प्रधानमंत्री ने खाद्य तेल आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय मिशन का नेतृत्व किया।

RKTV NEWS/ नई दिल्ली 14 मार्च। भारत वर्तमान में खाद्य तेल का शुद्ध आयातक है, कुल खाद्य तेल का 57 प्रतिशत विदेशों से आयात किया जाता है। खाद्य तेल की अपर्याप्तता हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है और 20.56 बिलियन अमरीकी डालर इसके आयात पर खर्च होता है। देश के लिए तिलहन और पाम तेल को बढ़ावा देने के माध्यम से खाद्य तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने खाद्य तेल उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर पर ध्यान केंद्रित करते हुए केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान मिशन पाम ऑयल पर बात की और इस मिशन के तहत पहली तेल मिल का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने पाम की खेती करने के लिए किसानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मिशन पाम ऑयल खाद्य तेल क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा और किसानों की आय को बढ़ावा देगा।”
भारत सरकार ने अगस्त 2021 में खाद्य तेलों के लिए राष्ट्रीय मिशन – ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) लॉन्च किया। यह मिशन, ऑयल पाम की खेती को बढ़ाने और 2025-26 तक कच्चे पाम तेल के उत्पादन को 11.20 लाख टन तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह योजना वर्तमान में देशभर के 15 राज्यों में जारी है, जो 21.75 लाख हेक्टेयर के संभावित क्षेत्र को कवर करती है। अब तक, मिशन के तहत क्षेत्र विस्तार के लिए 1 करोड़ रोपण सामग्री की क्षमता वाली 111 नर्सरी स्थापित की गई हैं और 1.2 करोड़ रोपण सामग्री की क्षमता वाले 12 बीज उद्यान भी स्थापित किए गए हैं।
ऑयल पाम मिशन को नए भौगोलिक क्षेत्रों में ऑयल पाम को बढ़ावा देने, रोपण सामग्री में सहायता के लिए किसानों को अंत तक सहायता प्रदान करने और निजी उद्यमियों से खरीद सुनिश्चित की गई है। तेल में वैश्विक मूल्य अस्थिरता को देखते हुए किसानों की मदद के लिए व्यवहार्यता अंतर भुगतान (वीजीपी) प्रदान किया गया है। सरकार ने समय पर पाम तेल की व्यवहार्यता कीमत को संशोधित किया है और अक्टूबर 2022 में 10,516 रुपये थी जिसे नवंबर 2023 में बढ़ाकर 13,652 रुपये कर दिया गया।
व्यवहार्यता अंतर भुगतान (वीजीपी) लाभ के अलावा सरकार ने राष्ट्रीय मिशन – ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) के अंतर्गत रोपण सामग्री और प्रबंधन के लिए किसानों को 70,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की विशेष सहायता उपलब्ध कराई है। पाम तेल की खेती के लिए किसानों को कटाई उपकरणों की खरीद के लिए 2,90,000 रुपये की सहायता दे रहा है। इसके अतिरिक्त कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) की स्थापना के लिए 25 लाख रुपये की सहायता दी गई है।
मिशन के तहत प्रसंस्करण कंपनियां ऑयल पाम किसानों के लिए वन-स्टॉप सेंटर भी स्थापित कर रही हैं जहां वे इनपुट, कस्टम हायरिंग सेवाएं, अच्छी कृषि प्रथाओं की कृषि सलाह और किसानों की उपज का संग्रह की सुविधा दे रहे हैं।
यह दूरदर्शी पहल आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, किसानों को सशक्त बनाने और भारत में खाद्य तेल उत्पादन के लिए एक स्थायी तथा आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राष्ट्रीय मिशन – ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) खाद्य तेलों के महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत के समर्पण का एक प्रमाण है।

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