RKTV NEWS/नई दिल्ली 08 मार्च।केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार को कोयला मंत्रालय में आयोजित एक कार्यक्रम में “भारत की कोयला निर्देशिका 2022-23” शीर्षक से वार्षिक सांख्यिकीय प्रकाशन जारी किया। इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के सचिव अमृत लाल मीणा (वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से) एवं मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा लोक उपक्रमों (पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स – पीएसयूएस) के अधिकारी (वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ही) उपस्थित थे।
कोयला नियंत्रक संगठन (कोल कंट्रोलर आर्गेनाईजेशन-सीसीओ) द्वारा विस्तार से सावधानीपूर्वक तैयार किया गया यह वार्षिक प्रकाशन कोयला और लिग्नाइट क्षेत्र के शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और विभिन्न हितधारकों की डेटा-संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने में आधारशिला के रूप में कार्य करता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में कोयला एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही देश के ऊर्जा मिश्रण की आधारशिला के रूप में कार्य करता है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और तेजी से बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ ऊर्जा की मांग भी लगातार बढ़ रही है। कोयला देश में उस वाणिज्यिक ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत बना हुआ है जिससे भारत की कुल ऊर्जा खपत के लगभग आधे भाग की पूर्ति होती है। भारत की सीमाओं के भीतर इसकी प्रचुरता से उपलब्धता एक ऐसी विश्वसनीय और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करती है जो औद्योगिक विकास को बनाए रखने, शहरीकरण को शक्ति देने और बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र एक स्थिर बेस-लोड बिजली आपूर्ति प्रदान करते हैं, जो ग्रिड स्थिरता बनाए रखने एवं देश भर में उद्योगों, व्यवसायों और घरों की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
ऊर्जा सुरक्षा से परे, कोयला विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाते हुए रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ ही सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देकर भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोयला खनन उद्योग विशेष रूप से प्रचुर कोयला भंडार वाले क्षेत्रों में लाखों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नौकरियों का समर्थन कने के साथ-साथ आर्थिक विकास और आजीविका को भी बढ़ावा देता है। विनिर्माण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक कच्चा माल प्रदान करने के अतिरिक्त कोयला कई प्रमुख उद्योगों जैसे इस्पात (स्टील), सीमेंट और उर्वरक उत्पादन का अभिन्न अंग हैI रॉयल्टी और करों सहित कोयला, खनन गतिविधियों से उत्पन्न राजस्व, सरकारी राजस्व, आवश्यक सामाजिक और बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। कुल मिलाकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए कोयले का महत्व सतत वृद्धि और विकास के संचलन में एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में इसके महत्व एवं स्थिति को रेखांकित करता है।
डेटा के प्रभावी विश्लेषण और सूचित निर्णय लेने की प्रक्रियाओं के लिए कोयला और लिग्नाइट से संबंधित सटीक एवं उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़ों की उपलब्धता होना सर्वोपरि है। इस दृष्टि से “भारत की कोयला निर्देशिका 2022-23” वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए कोयला और लिग्नाइट क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं को समाहित करते हुए महत्वपूर्ण डेटा के एक व्यापक भंडार के रूप में कार्य करती है।
यह प्रकाशन कोयला भंडार, उत्पादन, उत्पादकता, पिट-हेड क्लोजिंग स्टॉक, निजी स्वामित्व वाले (कैप्टिव) और वाणिज्यिक ब्लॉकों का कार्य निष्पादन, विभिन्न क्षेत्रों के लिए श्रेणी (ग्रेड) -वार प्रेषण, आयात और निर्यात आंकड़े, कोयला वॉशरी, रॉयल्टी, जिला खनिज संस्थानों (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन- डीएमएफ), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट –एनएमईटी) के अतिरिक्त कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। यह हितधारकों को विश्वसनीय और अद्यतन डेटा के आधार पर सुविज्ञ निर्णय लेने का अधिकार देता है और इस प्रकार कोयला और लिग्नाइट क्षेत्र के सतत विकास में योगदान देता है।

next post
