
जग रुलाता है मां हंसाती है !
तन्हाई में याद कभी जब आती है ।
तस्वीरों से बात मेरी हो जाती है ।।
मोबाइल का आज जमाना है आया ।
तस्वीरें हैं पास नहीं अब पाती है ।।
वो करती मिस काल अंधेरी रातों में ।
उठते -उठते मोबाइल कट जाती है ।।
खुशियों की परवाह मुझे कैसे होगी ।
ग़म आयी है हाथ हमारी थाती है ।।
हो जाती है भेंट कभी जब मेले में ।
होठों से आंचल दाबे शरमाती है ।।
करती थी मां प्यार कभी बाबू जी से ।
मां मेरी अनहोनी से घबराती है ।।
होता जब मायूस सुनाती मां किस्से ।
खुद रोती मां लेकिन हमें हंसाती है ।।


