
डर लगता है..!
तन्हाई से डर लगता है।
सूना सूना घर लगता है।।
यादों में खोकर क्या जीना।
मरना ही बेहतर लगता है।।
तंग बहुत है घर का कमरा।
बाहर से खंडहर लगता है।।
पाँव अगर फैलाऊँ भी तो।
दीवारों से सर लगता है।।
टूटी है दीवार भी छत की
कब गिर जाए डर लगता है।।
ढह जाए जाने कब मुझपर।
घर मेरा जर्जर लगता है।।
घर वीरान मधु है मेरा।
तुम बिन ये अक्सर लगता है।।

