भोपाल/मध्यप्रदेश 25 नवंबर।वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच मध्यप्रदेश इकाई की ऑनलाइन गोष्टी आज संपन्न हुई।मुख्य अतिथि थे हरियाणा इकाई के अध्यक्ष सुजीत कुमार जो भारत सरकार में उप सचिव हैं और विशिष्ट अतिथि थे फरीदाबाद से प्रदीप कुमार गर्ग जो सेवा निवृत शिक्षक है, हाइकु और दोहे में पारंगत हैं। अध्यक्ष जया आर्य ने बताया की 22 कविगणों ने इस में हिस्सा लिया उन्होंने कहा “मेरी वफ़ा को याद करोगे तो तन्हाइयों से घबरा जाओगे,
इन्हीं तन्हा लम्हों में तुमने किए थे हमसे वादे कई।
महासचिव संतोष श्रीवास्तव ने कहा कविता मन की भावनाएं सामने लाती है, पहले एक दूसरे को सुना कर उसके बाद रचना की प्रक्रिया आगे बढ़ाते है, उन्होंने राम उत्सव मांडव पर चित्रित अपनी कविता सुनाई।
सरस्वती वंदना प्रस्तुत की दुर्गा रानी श्रीवास्तव ने आभार प्रस्तुत किया सुनीता प्रकाश ने।
सुनीता प्रकाश की कविता थी सुनहरे सपने सबके आंखों में समंदर की गहराई रखते हैं चांद सितारों को देखने की कामना रखते हैं।
उषा चतुर्वेदी ने ननद और देवर के पास होने वाले मुस्कान की बात कही,
कवि अशोक गौतम ने आतंकवादी घटनाओं पर अपने देश को सुरक्षित रखने की बात कही,
वंदना मिश्रा ने कहा ममता का आंचल लुप्त हो रहा है, शब्दों से खिलवाड़ हो रहा है सारे रिश्ते बदल रहे है।
आशा सिंह कपूर ने लिखा चांद पर कविता “चंदा तू चमकता है गगन में रूप बस गया तेरा मन में”
पटवा जी ने कहा “फरमान रुखसत कब चले गए बहुत दूर से कब्र सजा कर चले गए” ।
प्रदीप गर्ग ने सभी के कविताओं की समीक्षा की और अपनी रचना की प्रस्तुत दी।
सुजीत कुमार मुख्य अतिथि थे आपने कहा”तेरी आंखों को झील रुख को कमल क्यों कहा, दिल का मौसम बदल नहीं सकते, यह दुश्वरी है दोनों पैर साथ नहीं चलते, तुम्हारे तो चेहरे बदल जाते हम आंखें नहीं बदल सकते,” अच्छी गजल सुनाई।
पुनीत चंद्रा ने तकनीकी सहयोग दिया, उन्होंने कहा “तेरी तस्वीर बनी होगी प्यार की बातें लिखी होगी,लिखा हुआ तुम सब दे दो मुझको वो आधा पन्ना दे दो। श्रीमती सुनीता प्रकाश ने प्रदर्शित किया।
