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आईएफएफआई ने राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन के तहत कुशलापूर्वक रिस्टोर की गई सात क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग का उत्सव मनाया।

पणजी/ गोवा 23 नवंबर।निदेशक केतन आनंद ने क्लासिक फिल्मों को रिस्टोर करने में भारत सरकार और एनएफडीसी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “उन्होंने प्रिंट वर्जन लिया है और इसे रिस्टोर किया है, यह एक महत्वपूर्ण तकनीक और एक कठिन प्रक्रिया है, जिसमें फ्रेम दर फ्रेम रिस्टोर करना शामिल है।” वे आज गोवा में 54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के मौके पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
भारत-चीन के बीच 1962 के युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म हकीकत 1 को रिस्टोर किए जाने के बारे में बात करते हुए, आनंद ने याद किया कि कैसे फिल्म ने युद्ध के मानवीय पक्ष और सभी बाधाओं के बावजूद सैनिकों की सहनशीलता को दर्शाया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता के काम के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई और इसे बरकरार रखते हुए इसके रंगीन वर्जन को 54वें आईएफएफआई में प्रदर्शित किया गया। आनंद ने कहा, “कोई भी श्वेत-श्याम रंग को हटा नहीं सकता है, लेकिन रंगीन वर्जन युवा पीढ़ी के लिए है, ताकि यह उनके लिए आकर्षक बन सके।” केतन आनंद ने अगले साल महान अभिनेता देव आनंद के सम्मान में एक फिल्म हकीकत 2 और एक वेब सीरीज बनाने की भी घोषणा की।
वैभव आनंद ने कहा, “उचित प्रणाली की कमी के कारण हमने अतीत में फिल्मों के कई प्रिंट गंवा दिए है।” उन्होंने सेल्युलाइड वर्जनों को संरक्षित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कैसे एक लागत-केंद्रित प्रक्रिया है। उन्होंने डिजिटल तकनीक द्वारा पेश की जाने वाली संभावनाओं पर जोर देते हुए क्लासिक फिल्मों के सेल्युलाइड वर्जन को संरक्षित करने की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए कहा, “डिजिटल की ओर बढ़ना बेहतर है।” वैभव आनंद ने इस प्रक्रिया में शामिल जटिलताओं और आवश्यक पेशेवर विशेषज्ञता को स्वीकार करते हुए एनएफएआई के फिल्म संरक्षण से जुड़े प्रयासों की सराहना की।
वैभव ने कहा कि पुरानी क्लासिक फिल्मों के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए आईएफएफआई जैसे और अधिक महोत्सव आयोजित किए जा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे यह सीमित संसाधनों वाले देश के आंतरिक और दूरदराज के हिस्सों के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और फिल्म उद्योग में मौका पाने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
महोत्सव के निदेशक और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फिल्म) पृथुल कुमार ने कहा, “54वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि हम एक सामूहिक प्रयास की परिणति- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा उदारतापूर्वक वित्त पोषित, राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन के तहत कुशलतापूर्वक रिस्टोर की गई सभी सात क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए एक मंच पर आए हैं।”
राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन हमारी सिनेमाई विरासत के अमूल्य खजाने को संरक्षित करने के लिए हमारे देश की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है। यह एक ऐसी यात्रा है जो हमारी सांस्कृतिक पहचान को आकार देने और कहानी कहने की कला के प्रति जोरदार सराहना को बढ़ावा देने में हमारी सिनेमाई विरासत के महत्व को चिन्हित करती है। एनएफडीसी-एनएफएआई पिछले कई महीनों से रिस्टोर करने का काम कर रहा है, जहां प्रत्येक फ्रेम को कुशलतापूर्वक रिस्टोर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य हमारे सिनेमाई इतिहास को संरक्षित करना है और जिस तरह से हम आज कंटेंट देखते हैं, वह 4के रेजॉल्यूशन में है।

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