आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)15 नवंबर।कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर प्रवीण कुमार द्विवेदी ने जानकारी दिया कि अनुकूल कृषि कार्यक्रम से जुड़े गांव खेसरहिया में माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आज प्रारंभ किया जा रहे विकसित भारत संकल्प यात्रा के सीधे प्रसारण में किसानों के साथ भाग लिया। झारखंड के स्थापना दिवस एवम भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर उनकी जन्मस्थली खुटी जिले के उलीहातु गांव मे आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर सीधे प्रसारण कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा प्रधानमंत्री के द्वारा किसान सम्मान निधि की 15वीं किस्त के अतिरिक्त विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत भी की गई ।
माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा पीएम जनजाति आदिवासी कल्याण महाभियान की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दी गई।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि इस कार्यक्रम से देश के सुदूर इलाकों में उपस्थित जनजाति समुदाय के लोग देश की मुख्य धारा में पूरे उत्साह के साथ जुड़ेंगे।आपने आगे बताया कि देश के चार मुख्य स्तंभ है जिसमें भारत की नारी शक्ति किसान भाई नौजवान तथा भारत का मध्यम वर्ग एवं गरीब मजदूर है जिन्हें मजबूत करके ही देश मजबूत हो सकता है। उन्होंने आगे बताया कि देश में विकास की विभिन्न योजनाओं के कारण आज 13 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से ऊपर आ चुके हैं।
भारत संकल्प यात्रा अगले वर्ष 26 जनवरी को पूर्ण होगी और इस यात्रा के क्रम में देश के सभी पंचायत एवं गांव में भारत सरकार के द्वारा वर्तमान में चल रही सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का और उन्हें जोड़ने का एक माध्यम बनेगी।
आज झारखंड राज्य के लिए 50 हजार करोड़ से ज्यादा की सड़क रेल और अन्य कार्य से जुड़ी परियोजनाओं का भी शुभारंभ हुआ झारखंड अब 100% रेल से जुड़ा हुआ देश का राज्य बन गया। किसान सम्मन निधि कार्यक्रम के द्वारा 8 करोड़ किसानों के लिए 18 करोड़ की राशि का हस्तांतरण किया गया।
उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए डॉक्टर द्विवेदी ने जानकारी दी कि मौसम में बदलाव हो रहा है जलवायु परिवर्तन को देखते हुए हमें सावधानी बरतने की आवश्यकता है हमारे पानी के साधन सीमित है और इसके लिए हमें अपनी खेती में परिवर्तन कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। पारंपरिक खेती में पोटाश एवं सल्फर का प्रयोग हमें तिलहन दलहन सब्जी एवं अनाज वाली फसलों में करने की आवश्यकता है। सूक्ष्म एवं फवारा पद्धति से सिंचाई के जल का प्रबंध अगर किया जाए वैसी स्थिति में सिंचाई की उपयोगिता क्षमता काफी बढ़ जाती है। किसानों के द्वारा तिलहन एवं दलहन में खरपतवार नियंत्रण की जिज्ञासा प्रकट की गई। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक शशि भूषण कुमार शशि ने सब्जियों की फसलों में होने वाले समस्याओं के बारे में जानकारी दी और किसानों के सलाह दिया कि अपने खेतों में कैल्शियम और मैग्नीशियम का प्रयोग अवश्य करें ।इस व्यावसायिक कंपनियों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हुए।



