
बक्सर/ बिहार (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)31 मार्च। रविवार को श्री त्रिदण्डी स्वामी सेवा आश्रम ब्रह्मपुरधाम में चैती नवरात्र के पावन अवसर पर नव दिवसीय मानस महोत्सव का शुभारंभ ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज की सन्निधि मे हुआ। पूजन अर्चन के पश्चात श्रीराम चरित मानस का नवाह्न प्रेम पाठ का शुभारंभ हुआ। प्रथम विश्राम के पश्चात अपराह्न में प्रवचन का शुभारंभ करतू हुए ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर ने सनातनी वर्ष 2082 की शुभकामनाएं देते हुए जीवमात्र के कल्याण की कामना की। आचार्य जी ने कहा कि कलीकाल में श्रीमानसजी का पाठपरायण सहज सरल साधना है।इसके पाठ से लोक और परलोक दोनो बनता है।पावनक्षेत्र सोनभद्र से पधारे पं.विवेकानंद जी महाराज, फैजाबाद से पधारे आनंद शास्त्री, काशी से पधारे विश्वैशदास जी महाराज ने श्रीराम जी के जन्म के हेतु पर प्रकाश डाला।अन्त मे जीयरस्वामीजीके कृपा पात्र आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने कहा श्रीराम जी धर्म के रूप हैं,मर्यादा के स्वरूप हैं,सेवा, संयम,त्याग सनातन की मूर्ति है। इनका जीवन अनुकरणीय है। पाठपरायण अनुसार नाम महिमा, याज्ञवल्क्य भरर्द्वाज संवाद का जीवन्त वर्णनकरते हुए आचार्य जी ने कहा राम भक्ति की कसौटी है शिवभक्ति ।शिवशक्ति पीठम् और गौरी शंकर विवाह महोत्सव आश्रम के भक्त वृन्द सक्रियता के साथ व्यवस्था संभाल रहे है।
