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टीपीएस कॉलेज में एडवांस मोलेक्युलर बायोलॉजी टेक्नोलॉजी पर ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित।

पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 6 अक्टूबर। पटना के टीपीएस कॉलेज में एडवांस  मोलेक्यूलर बायोलॉजी टेक्नोलॉजी विषय पर यूनिवर्सिटी वनस्पति विज्ञान के संयुक्त तत्वावधान में हाई मीडिया के सहयोग से दो दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रोफेसर उपेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मॉलेक्युलर बायोलॉजी का क्षेत्र व्यापक है। देश के सभी विश्वविद्यालयों में इस विषय की स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाई हो रही है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के साइंस की डीन प्रोफेसर रिमझिम शील ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में पांच विश्वविद्यालयों के कई कॉलेज के शिक्षक, रिसर्च स्कॉलर, पोस्ट ग्रेजुएट एवं अंडर ग्रैजुएट छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, बी आर ए बी यू ,  टी एम बी यू , जी बिहार एवं आर एमआरआईएमएस के 76 प्रतिभागियों ने भाग लिया। बॉटनी के विभागाध्यक्ष डॉ विनय भूषण कुमार ने एडवांस मॉलेक्युलर बायोलॉजी तकनीक में कैरियर की जानकारी देते हुए बताया कि मॉलेक्युलर बायोलॉजी यानी आणविक जीव विज्ञान एक दुर्लभ क्षेत्र है जिसमें बहुत अधिक संभावनाएं हैं।

टीपीएस कॉलेज पटना में एडवांस मॉलेक्युलर बायोलॉजी टेक्नोलॉजी विषय पर आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम

बुनियादी और अनुप्रयुक्त विज्ञान के अन्य क्षेत्रों की तुलना में प्रतिस्पर्धा बहुत कम है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में नौकरियों के लिए उन्नत लैब उपकरण जैसे क्लोनिंग किट, डीएनए सिंथेसाइजर, इलेक्ट्रॉनिक गन, डीएनए सिक्वेंसी, वेस्टर्न ब्लाॅट आदि के साथ काम करने की आवश्यकता होती है। मॉलेक्युलर बायोलॉजिस्ट के पास निजी उद्योगों, विश्वविद्यालय में शोध कार्य या सरकारी एजेंसियों के लिए नौकरी पाने का अवसर है। वर्तमान दौर में मॉलेक्युलर बायोलॉजी का क्षेत्र व्यापक हो गया है। इसके द्वारा विभिन्न प्रकार के रोगों के बारे में आसानी से पता किया जा सकता है। ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट में इसका व्यापक प्रयोग है। पीसीआर के द्वारा वायरस, बैक्टीरिया, फंगस जनित रोगों का पता किया जाता है। कोरोना के समय में इसका व्यापक प्रयोग हुआ। इसके द्वारा पर्यावरण इंजीनियरिंग, फूड प्रोसेसिंग एवं सीवरेज ट्रीटमेंट में काफी सहयोग मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे जीव विज्ञानी विशिष्ट वैज्ञानिक समस्याओं के सलाहकार के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ विश्वविद्यालों में भी अनुसंधान के बहुत सारे अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने यूएस ब्यूरो आफ लेबर स्टैटिसटिक्स की एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले 10 वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। जिसका अर्थ है कि एक बेहतरीन कैरियर बनाने का यह सुनहरा अवसर है। आणविक जीव विज्ञान के डिग्री धारी शुरुआत में भारत में 6 लाख रुपये के आसपास प्रतिवर्ष कमा सकते हैं जो अनुभव के साथ बढ़ेगा। आने वाले वर्षों में मॉलेक्युलर बायोलॉजी की पढ़ाई वैल्यू ऐडेड कोर्स में होगी। महाविद्यालय के वरीय शिक्षक प्रोफेसर अबू बकर रिजवी, प्रोफेसर कृष्णनंदन प्रसाद एवं प्रोफेसर श्यामल किशोर ने भी समारोह को संबोधित किया।

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