RKTV NEWS/नई दिल्ली,11 मई।भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने 10 मई 2023 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद की पहली बैठक आयोजित की। राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद की स्थापना एक प्रशासनिक और कार्यात्मक निकाय के रूप में रैंप (आरएएमपी) कार्यक्रम सहित एमएसएमई क्षेत्र में अनिवार्य सुधारों पर केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के बीच आपसी समन्वय, केंद्र और राज्यों के बीच आपसी तालमेल तथा सलाह एवं निगरानी का कार्य करने के लिए की गई है।
यह कार्यक्रम केंद्र की योजना “एमएसएमई के प्रदर्शन को बढ़ाना और तेजी लाना” के तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जून 2022 में लॉन्च किया गया था। रैंप कार्यक्रम का उद्देश्य बाजार और ऋण तक पहुंच में सुधार करना, संस्थानों और शासन को मजबूत करना, केंद्र और राज्य, केंद्र-राज्य लिंकेज और साझेदारी में सुधार, विलंबित भुगतान के मुद्दों को संबोधित करना तथा एमएसएमई को समृद्ध बनाना है।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय एमएसएमई मंत्री श्री नारायण राणे ने की। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, मंत्री ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से एमएसएमई क्षेत्र के प्रचार और विकास की दिशा में काम करने का आह्वान किया ताकि उनके प्रयासों से इस क्षेत्र में आय और रोजगार में वृद्धि हो सके और देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान मिल सके।
एमएसएमई राज्य मंत्री श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा ने भी राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई। उन्होंने विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में एमएसएमई का समर्थन करने की आवश्यकता को दोहराया और केंद्र तथा राज्य स्तर की पहलों के बीच तालमेल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका होगी तथा इसे केंद्र और राज्यों के प्रयासों के आपसी तालमेल का नेतृत्व करना चाहिए।
बैठक में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के सचिवों और 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख सचिवों और नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। एमएसएमई सचिव श्री बी.बी. स्वैन ने परिषद को संबोधित करते हुए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों से परियोजना में सक्रिय रूप से भाग लेने और एमएसएमई विकास के राष्ट्रीय एमएसएमई एजेंडे का हिस्सा बनने के लिए इस अवसर का लाभ उठाने का आग्रह किया तथा प्रोत्साहित किया।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने परियोजना के बारे में उत्साह दिखाया और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
