आरा/भोजपुर (अमरेश सिंह)30 अगस्त।कवि व गीतकार शंकर शैलेन्द्र की जयंती की पूर्व संध्या पर मंगलवार को जनमित्र कार्यालय, पकड़ी, आरा में “शंकर शैलेन्द्र की रचनाधर्मिता” विषयक “बातचीत” की शुरूआत उपस्थित बच्चों द्वारा शंकर शैलेन्द्र की कालजयी रचना “झूठे सपनों के छल से निकल” के गायन के द्वारा स्मृति नमन से हुई।
बातचीत के दौरान लोगों ने स्मृति नमन करते हुए कहा कि शैलेन्द्र के रचनाओं में सामाजिक सरोकारों की प्रतिबद्धता है, जिसके चलते वे आज भी हमारे लिए उतने ही प्रसांगिक है जितना अपने समकालीन थे। क्या बच्चा क्या वृद्ध, क्या नारी क्या पुरूष कही न कहीं सबके बेहतरी के लिए उन्होंने कलम चलाए।
सामाजिक समरसता, भाईचारा, विश्वास, जनजागरण को लिए हुए इनके रचनाएं आज भी हमें उत्प्रेरित करती हैं और स्वस्थ समाज के लिए हमे दिशा मिलती है। शैलेन्द्र की जनपक्षीय रचनाधर्मिता के कारण ही साहित्य व सिनेमा से “क्रांतिकारी कविताओं के कवि” “मजदूरों के विरल कवि” “जीवन के चितेरे” “आधुनिक कबीर” जैसे नाम भी मिले।
हम सब शैलेन्द्र के रचनाओं को जन जन तक पहुंचाए और उनके रचनाओं के भावना के साथ चलें,,,, यही उनके लिए सच्चा स्मृति नमन होगा।
अंत में बच्चों ने पुनः इनकी उत्प्रेरक रचना “तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत में यकीन कर” को सुनाया।
इस अवसर पर नीलाम्बुज सरोज,जीतेन्द्र शुक्ला, मनोज कुमार “झमन”, मधु कुमारी, प्रिया कुमारी व विजय मेहता की भागेदारी रही।
अपने संबोधन में डॉ जितेंद्र शुक्ला ने शंकर शैलेन्द्र की लेखनी की चर्चा करते हुए बताया की शंकर दास केसरीलाल शैलेंद्र एक लोकप्रिय भारतीय हिंदी उर्दू कवि ,गीतकार और फिल्म निर्माता थे जो फिल्म निर्माता राज कपूर ,गायक मुकेश,और संगीतकार शंकर जयकिशन के साथ संबंध के लिए प्रसिद्ध थे साथ ही 1950 और 60 के दशकों में कई सफल हिंदी फिल्मों के लिए गीत भी लिखे।
इस अवसर पर अरविंद कुमार श्रीवास्तव, विमला देवी,नीतू देवी,आशा देवी,सुमन कुमारी, मंजीत कुमार, खुशी कुमारी, संध्या कुमारी,अनमोल कुमार,रितेश कुमार, निक्की कुमारी, रवि कुमार आदि की उपस्थिति रही।
बच्चों के हौसला के लिए नीलाम्बुज सरोज और जीतेन्द्र शुक्ला ने सभी बच्चों को उपहार भेंट किए और मनोज कुमार “झमन” ने बच्चों के लिए, बच्चों द्वारा संचालित ” चिल्ड्रेन बैंक ऑफ जनमित्रा” को ₹2000 की राशि भेंट की।
