
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से श्रोता हो रहे अंतःमुग्ध।
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर) 23 अगस्त। मानव जीवन कई प्रकार के राग और द्वेषों से युक्त हैं। जन्म एवं मृत्यु तक के सफर में मानव के समक्ष ऐसी कई व्यवहारिक चुनौतियां आती हैं जहां वो धर्म और अधर्म को ले दिगभ्रमित होता है। आज के कलयुगी काल में हर इंसान अपनी अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए व्याकुल है जिसके लिए वो किसी भी अनैतिक, अधार्मिक युक्ति के जरिए उसकी पूर्ति करने से भी पीछे नहीं हटता है।लेकिन सभी योनियों में श्रेष्ठ मानव योनि का मकसद केवल अपनी अपनी स्वार्थ सिद्धि करना नही है वरन इस योनि का कर्तव्य समस्त जीवों के कल्याण हेतु निहित है। उक्त संबोधनो को व्यक्त करते हुए सत्कर्म और मोक्ष की प्राप्ति हेतु भागवत ज्ञान कथा का वाचन करते हुए पंडित निर्मल कुमार तिवारी ने स्थानीय चंदवा स्तिथ सूर्य मंदिर परिसर में आयोजित 07 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान कही।
विदित हो कि सूर्य मंदिर परिसर में 15 से 25 अगस्त तक का सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है जिसमे पंडित निर्मल कुमार तिवारी द्वारा भागवत कथा का पाठ किया जा रहा है।इस धार्मिक आयोजन में आस पास के कई गांव ,कस्बें के लोगो का आगमन हो रहा है जिसमे धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से ज्ञान की प्राप्ति कर रहे हैं।
कथा वाचक पंडित निर्मल कुमार तिवारी ने ज्ञान कथा यज्ञ के चौथे और पांचवें दिन भागवत से लोगो को आत्मसात कराते हुए भागवत महा पुराण के माध्यम से गज और गाह ,समुंद्र मंथन, कक्षप अवतार ,स्वर्ग पर चढ़ाई,वामन अवतार ,राजा सागर, रंती देव,कौरव और पांडव,वासुदेव आदि की कथा को विस्तार पूर्वक श्रोताओं को समझाया।
