
RKTV NEWS/अनिल सिंह 12 अगस्त।शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार से सरकारी विद्यालयों से विमुख होती असंख्य आबादी पर चिंता जताते हुए और इसके विपरित निजी विद्यालयों की बढ़ती संख्याओं एवं आए दिन उनके द्वारा किए जा रहे शिक्षा के नाम पर महंगी किताबों,शिक्षा सामग्री के लिए विद्यालय परिसर या नियत दुकान से खरीदारी हेतु विवश करना, कई निजी विद्यालयों द्वारा सीबीएसई मापदंडों के विरुद्ध विभिन्न रूपों से शुल्कों की उगाही करने का जिम्मेवार ऑल इंडिया अभिवावक संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार राय ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को ठहराया है। ऑल इंडिया अभिभावक संघ अध्यक्ष राकेश कुमार रॉय ने अपने द्वारा मांगी गई आरटीआई के माध्यम से ये बताया है कि राज्य के कुल 75466 विद्यालयों में से 27911 विद्यालयों में चहारदीवारी है और 47555 स्कूलों की चहारदीवारी नहीं है।

इस पर सवाल उठाते हुए राकेश रॉय ने कहा है की अब ये तय होना चाहिए की आखिर सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ गरीबों का स्कूल क्यों बना कर रखा है। जब बजट की कोई कमी नहीं है तो अभी तक ये हालात क्यों बना हुआ हैं। सरकार की कार्यशैली यह दर्शाती है की किसी साजिश के तहत सरकारी विद्यालयों का उत्थान नहीं होने दिया जा रहा है। क्या ऐसा कर सरकार आम आदमी को भी अपने बच्चों को प्राईवेट स्कूल में भेजने पर मजबूर नहीं कर रही हैं? जहां बच्चें सकुशल ही नहीं रहेगें वहां कौन भेजेगा अपने बच्चों को पढ़ने के लिए। उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा की क्या स्कूल सिर्फ खिचड़ी खिलाने के लिए और भ्रष्टाचार करने के लिए बना है? कोई बदलाव क्यों नहीं दिख रहा वहीं इसका फायदा निजी विद्यालयों को मिल रहा है उनकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। संघ के अध्यक्ष ने सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मांग की है की सरकारी विद्यालयों को सुरक्षित और सुदृढ़ करने की ओर गंभीरता से ध्यान की आवश्यकता है ताकि सभी आम नागरिक संविधान द्वारा प्रदत्त शिक्षा के मौलिक अधिकार का लाभ सरकारी विद्यालयों से प्राप्त कर सकें और अपनी न्यूनतम आमदनी में भी अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकें।

