पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 27 अप्रैल। लोकसभा चुनाव का दूसरा चरण भी प्रधानमंत्री जी को राहत देने वाला नहीं है। अररिया और अन्य जगहों पर चुनावी सभाओं में उनका जो भाषण हो रहा है, उसकी भाषा से उनके अंदर की बेचैनी जाहिर हो रही है। प्रधानमंत्री जी के भाषणों में सत्ता जाने का भय साफ सुनाई दे रहा है। यह कहना है राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी का। उन्होंने कहा कि अब 400 पार तो सपना है। बहुमत के लिए जरूरी 272 की जादूई संख्या भी हिमालय लांघने जैसा कठिन दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में पहले चुनाव से लेकर इस चुनाव तक कई प्रधानमंत्री बने लेकिन इस चुनाव में प्रधानमंत्री जी ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है वैसी भाषा का प्रयोग सत्ता जाने की संभावना को प्रत्यक्ष देखने के बाद भी किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की भाषा को ही अगर थर्मामीटर की तरह इस्तेमाल किया जाय तो स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री जी के भाषणों में सत्ता जाने का भय साफ सुनाई दे रहा है। अगर शुरुआत हार की संभावना से होती है तो हर चरण में उसकी गति और तेज होती जाती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि दूसरे चरण के बाद संभावित नतीजे को देखकर हमारे प्रधानमंत्री जी किस प्रकार की भाषा के जरिए इसको पलटने का प्रयास करते हैं।

