आरा/भोजपुर (अमरेश सिंह) 19 जुलाई।12 जुलाई से चल रहे बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिलेटर संघ की ओर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का भाकपा-माले ने समर्थन करते हुए आज प्रखंड कार्यालय परिसर में हड़ताल पर बैठी आशाकर्मियों के आंदोलन में शामिल हुए माले नेता।
इस दौरान आशाकर्मियों के हड़ताल के समर्थन में माले नेताओं ने आशा को सरकारी सेवक का दर्जा ,परिपोषित नहीं मानदेय ,1हजार परिपोषित के बदले 10 हजार मानदेय ,सभी बकाया राशि का अविलंब भुगतान करने,आशा के भुगतान में व्याप्त भ्रष्टाचार और कमीशन पर रोक लगाने,आशा फैसिलिलेटर को 20 दिन की जगह पूरे माह का भ्रमण-भत्ता दैनिक 500 रुपए के दर से भुगतान करने,आशा को समाजिक सुरक्षा पेंशन एवं पेंशन का लाभ दिया देने,जब-तक लाभ नहीं जब-तक रिटायरमेंट पैकेज के रुप में एक मुस्त 10 लाख रुपए का भुगतान करने आदि की जोरदार नारेबाजी की!इस दौरान माले नेताओं ने कहा बिहार की आशाकर्मी महिलाए आम तौर पर गरीब घर की होती है और महिलाएं विकट परिस्थितियों में महिलाओं के लिए अपनी सेवा देती है लेकिन सरकार द्वारा उन्हें इसके एवज में न्यूनतम मानदेय भी नहीं दिया जाता है।आशा महिलाओं को नियमित भुगतान भी नहीं किया जाता है जिससे इन गरीब महिलाओं को अपना जीविकापार्जन करने मे काफी संकट होता है जबकि आज इस महंगाई के दौर में सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी कर्मी को न्यूनतम मजदूरी 18 हजार रुपए से कम नहीं होना चाहिए इसलिए यह अविलंब लागू होना चाहिए।भाकपा-माले ने इनके मांगों को सरकार से अविलंब पूरा करने की मांग की।
हड़ताल का समर्थन करने वाले भाकपा-माले नेताओं में राज्य कमेटी सदस्य विजय ओझा, राज्य कमेटी सदस्य क्यामुद्दीन अंसारी,आरा नगर सचिव दिलराज प्रीतम के अलावे आशाकर्मी कांति देवी,देवंती देवी,संध्या देवी,रंभा कुमारी,माला देवी,राजकुमारी देवी,दुर्गावती देवी,कृष्ण कुमारी शर्मा,रम्मी देवी,लक्ष्मी कुमारी,रेनू कुमारी,बागमती देवी,रामावती देवी,प्रभावती देवी,अंजू देवी,प्रभावती देवी,सुशीला देवी,सुमित्रा देवी,सुभांति देवी आदि शामिल थी!

