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भोजपुर:देश की जनता मकान, जमीन, रोजगार, शिक्षा के लिए लड़ रही हैं,वे भाजपा के हिंदूवाद के झासे में नही आनेवाले हैं: राजाराम सिंह

मोदी सरकार महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के वे सारे अधिकार जो संविधान देता है, उसे छीन लेना चाहती हैं :मीना तिवारी

समागम में 9 मार्च को बदलें बिहार महाजुटान को सफल बनाने का आह्वान।

RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)25 जनवरी।आज स्थानीय नागरी प्रचारिणी सभागार में गणतंत्र दिवस के पूर्व दिवस पर शाहाबाद स्तरीय बदलो बिहार समागम का आयोजन हुआ। जिसमे मुख्य वक्ता काराकाट सांसद भाकपा(माले) नेता राजाराम सिंह थें। समागम में आरा सांसद सुदामा प्रसाद, चर्चित महिला नेत्री मीना तिवारी, भाकपा(माले) राज्य सचिव कुणाल, डुमरांव विधायक अजित कुमार सिंह, काराकाट विधायक अरुण सिंह, अगिआंव विधायक शिवप्रकाश रंजन, पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह व मनोज मंजिल समेत किसानों, मजदूरों, स्कीम कर्मियों – आशा, रसोइया, आंगनबाड़ी, जीविका – के नेताओं और विभिन्न सामाजिक व तबकाई संगठनों के नेता समागम में शामिल हुए।
समागम में मुख्य वक्ता राजा राम सिंह ने शाहाबाद के वीर सपूतों – मास्टर जगदीश, रामेंश्वर यादव, बटन मुसहर, का. रामनरेश राम, का. मणि सिंह और भैयाराम यादव को याद करते हुए कहा कि शाहाबाद ने राज्य व देश के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है और इस बार भी वह ऐसी भूमिका निभाने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि संविधान की पलेन्टिनम जुबली वर्ष में देश की जनता बाबा साहेब को नहीं तो क्या सावरकर का नाम याद करेगी? भाजपा को इससे क्यों परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि देश की जनता मकान, जमीन, रोजगार, शिक्षा के लिए लड़ रही हैं। वे भाजपा के हिंदूवाद के झासे में नही आनेवाले हैं।10 वर्षों से भाजपा कारपोरेट घरानों को हजारों करोड़ रुपयों की छूट दे रही है लेकिन गरीबों के लिए जो भी थोड़ी बहुत राहत थी उसे भी छीन रही है। बिहार में भाजपा-जदयू के लगभग 23 वर्षों के राज में बिहार कंगाली के द्वार पर आ खड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि बिहार बदलेगा तो देश भी बदल जायेगा। 2025 के विधानसभा का चुनाव इसकी शुरुआत साबित होगा और फिर देश की सत्ता पर काबिज फासीवादी भाजपा को भी सत्ता से बाहर कर देना है।
उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न तबकों व सामाजिक हिस्सों – दलित, पिछड़ों , अति पिछड़ों की एकता 9 मार्च को गांधी मैदान में होनेवाली बदलो बिहार रैली में भी दिखनी चाहिए।
समागम की मुख्य अतिथि मीना तिवारी ऐपवा राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि भाजपा को बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से भारी दिक्कत है। इसलिए वह उसकी जगह मनुस्मृति को थोपना चाहती है। वे महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के वे सारे अधिकार जो यह संविधान देता है, उसे छीन लेना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा दलित और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के साथ बलात्कार करने वालों को सम्मानित करता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को गरीबों की नहीं, कारपोरेट की चिंता है और ये कारपोरेट मजदूरों का खून चूसने के लिए आज 12 घण्टे काम और रविवार की छुट्टियों को भी खत्म कर देने का माहौल बना रहे हैं।
उन्होंने कहा की नीतीश कुमार झूठी घोषणाये करने के मामले में प्रधानमंत्री मोदी को भी पीछे छोड़ने का मन बना लिया है। राज्य के स्कीम कर्मी महिलाओ को बंधुआ मजदूर बना दिया गया है। गरीबों को 2 लाख रुपये देने की घोषणा भी झांसा साबित हुई है।उन्होंने समागम में आये लोगों से मिल-जुलकर संघर्ष छेड़ने 9 मार्च की बदलो बिहर महजुटान को सफल बनाने की अपील की।
आरा संसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि सोन नहरों के आधुनिकीकरण की मांग को लेकर क्षेत्र के सांसद जब प्रधानमंत्री से मिलने गए तो वे समय देने के बाद भी नही मिले। इससे भी उनके शाहाबाद और किसान विरोधी होने का अंदाजा लग जाता है। शाहाबाद इस अपमान बदला उनसे जरूर लेगा।
सांसद राजाराम सिंह का आरा के रास्ते जीरो ममाइल और धोबीघाटवा पर स्थानीय दुकानदारों और समाजसेवियों द्वारा बुके व स्मृति चिन्ह (सम्राट अशोक की मूर्ति) देकर देकर जोरदार स्वागत किया गया।
आरा सांसद सुदामा प्रसाद व काराकाट विधायक अरुण सिंह के साथ ही सम्राट अशोक जन्मदिवस आयोजन समिति के सदस्य भी उनके स्वागत में शामिल थे।
समागम में बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ, बिहार राज्य जीविका कैडर संघ, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, कैमूर, कैमूर मुक्ति मोर्चा , बिहार राज्य सीमेंट पत्थरकट्टी मजदूर यूनिय, डालमियानगर नगर परिषद सफाईकर्मी यूनियन सफाई मजदूर यूनियन, डुमरांव, अम्बेडकर विचार मंच, डुमरांव, चौसा किसान आंदोलन, आंगनबाड़ी, आरा, रसोइया संघ, आरा,फिजिकल ट्रेनर्स, बीपीएससी अभ्यर्थी आंदोलन, स्टैम्प वेंडर संघ, सहारा भुगतान संघर्ष मोर्चा, रविदास सेवा संस्थान, आरा, भोजपुर जिला रजक संघ,प्रजापति संघ, चौकीदार-दफादार संघ, विश्कर्मा महासंघ सहित दर्जनों संगठन शामिल हुआ।
आइसा जिला सचिव विकास कुमार ने समागम के 14 सूत्री प्रस्ताव का पाठ किया।

शाहाबाद स्तरीय बदलो बिहार समागम के प्रस्ताव

1. आज का समागम सामाजिक समानता व सांप्रदायिक सद्भाव का झंडा बुलंद करते हुए बिहार को सभी के लिए सम्मान, अधिकार और न्याय के रास्ते आगे बढ़ाने का संकल्प करता है, ताकि आने वाले दिनों में बिहार एक समृद्ध और न्यायपूर्ण राज्य बन सके.
2. समागम, बिहार की असली जरूरतों, बुनियादी सुविधाओं और लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए संघर्षरत सभी सामाजिक-आर्थिक समूहों, नागरिक समुदाय और जनता के विभिन्न हिस्सों के बीच व्यापक एकता का निर्माण करने और बिहार को बदल देने के लिए संघर्षों का ज्वार खड़ा करने का आह्वान करता है. इसी कड़ी में, 9 मार्च 2025 को पटना के गांधी मैदान में भाकपा-माले द्वारा आयोजित ‘बदलो बिहार महाजुटान’ में सभी प्रकार की आंदोलनकारी ताकतों का जुटान कर उसे ऐतिहासिक बनाने की भी अपील करता है.
3. समागम भा.ज.पा.-संघ द्वारा देश के संविधान और लोकतंत्र पर लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा करता है. विशेष रूप से संघ प्रमुख द्वारा देश की आजादी को नकारने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी की घोर आलोचना करता है. समागम संविधान व देश के गणतंत्र की रक्षा का संकल्प लेता है और संविधान प्रदत्त अधिकारों के जरिए फासीवादी ताकतों को मुकम्मल तौर पर शिकस्त देने का आह्वान करता है. भाकपा-माले द्वारा चलाए जा रहे संविधान बचाओ अभियान के तहत पूरे राज्य में 26 जनवरी को तिरंगा मार्च में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने की भी अपील करता है.
4. समागम बीपीएससी अभ्यर्थियों पर दमनकारी रुख और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा की आड़ में आतंक फैलाने की कड़ी निंदा करता है. जीविका कार्यकर्ताओं पर सरकार द्वारा किए जा रहे दमन के खिलाफ भी समागम पुरजोर विरोध दर्ज करता है. लोकतंत्र की जननी बिहार में तानाशाही स्थापित करने के ऐसे किसी भी कुत्सित प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. समागम, बीपीएससी पीटी परीक्षा की उच्चस्तरीय जांच, शिक्षा-परीक्षा तंत्र में व्याप्त माफिया तंत्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और आंदोलनकारी छात्रों और जनप्रतिनिधियों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग करता है.
5. समागम सरकारी वादा के अनुसार तमाम गरीबों को 2 लाख रुपये, 5 डिसमिल आवास भूमि और पक्का मकान की गारंटी करने, बिहार में जारी भूमि सर्वे पर रोक लगाते हुए सभी गरीब बसावटों का भौतिक सर्वे कराने और मुसहर, डोम, मेहतर, हलखोर, नट और बखो सहित सभी दलित-गरीब समुदाय बस्तियों को नियमित करने तथा सीलिंग, भूदान, सिकमी और पर्चा वाली जमीन का कागज लोगों को उपलब्ध कराने तथा बेतिया राज की अधिग्रहित जमीन पर गरीबों व जरूरतमंदों को मालिकाना हक देने की मांग करता है.
6. यह समागम खूनचूसक स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने, गरीबों और कृषि कार्य हेतु 200 यूनिट मुफ्त बिजली, 10 लाख से ज्यादा स्कीम वर्कर्स (जीविका दीदी, आशा, आंगनवाड़ी कर्मी, विद्यालय रसोइया, ग्रामीण नर्सों, मनरेगा मजदूरांे, सफाई मजदूरों आदि को केन्द्र सरकार द्वारा घेषित नई मजदूरी दर के मुताबिक पारिश्रमिक/मानदेय की गारंटी करने, वृद्धा-विधवा-दिव्यांग को कम से कम 3000 रुपये की सहायता उपलब्ध कराने, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की लूट पर रोक लगाने व उनके उत्पाद की सरकारी खरीद की गारंटी तथा सहारा निवेशकों का पैसा अविलंब वापस करने की मांग पर व्यापक आंदोलन के निर्माण का आह्वान करता है.
7. समागम बिहार में दलितों-पिछड़ों के आरक्षण विस्तार को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल करने और पूरे देश में जातीय गणना कराने की मांग करता है.
8. लगभग उद्योग रहित हो चुके बिहार में बंद पड़े चीनी, जूट, कागज व सूता सहित अन्य मिलों को चालू करने और कृषि आधारित उद्योगों की शृंखला खड़ी करने की विस्तृत कार्य योजना बनाने की मांग के साथ यह समागम गरीबी के दुश्चक्र में फंसे बिहार को बाहर निकालने के लिए विशेष राज्य का दर्जा अविलंब प्रदान करने की मांग करता है.
9. सोन नहरें शाहाबादक्षेत्र में खेती-किसानी की रीढ़ और सिंचाई का मुख्य साधन रही हैं। लेकिन दरकार की घोर उपेक्षा के कारण आज सोन नहर प्रणाली ध् होने के कगार पर है। रखरखाव व उड़ाही के अभाव में नहरों के अंतिम छोर तो छोड़ ही दीजिये, बीच तक भी पानी नहीं पहुच पाता है। सोन नहरों का अधुनिकीकरण शाहाबाद क्षेत्र की चिरलम्बित मांग है। समागम केंद्र राज्य सरकारों से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग करता है और इस मांग को लेकर संघर्ष धुर करने का संकल्प लेता है।
10. सोन नदी इस क्षेत्र की जीवन रेखा है लेकिन नदी से बालू का बेलगाम खनन इस नदी के जीवन के साथ ही इसके इर्द-गिर्द बसे लोगों के जीवन के लिए भी भारी संकट बन गया है। इसकी वजह से जलस्तर लगातार नीचे खिसक रहा है, पर्यजल का संकट पैदा हो रहा है, खेती-किसानी और जन स्वास्थ्य व पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। यह सरकार-माफिया गठजोड़ के जरिये बु की बेलगाम लूट पर रोक लगाने की मांग करता है और ‘सोन बचाओ – जीवन बचाओ’ आंदोलन छेड़ने का आह्वान करता है।
11. शाहाबाद क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में सरकार द्वारा जबरन खेती की जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ तथा उचित मुआवजे की मांग पर किसानों के आंदोलन चल रहै हैं। बक्सरजिले के चौसा और भोजपुर के चोराई-भेलाई-कल्याणपुर में सड़क और कैमूर और रोहतास में फ्रेट कॉरिडोर निर्माण के खिसाफ किसान सालों – महीनों से आंदोलनरत हैं। समागम इस किसान आंदोलनों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करता है और सरकार से अपने कदम पूछे हटाने की मांग करता है।
12. सम्मेलन कडवन डैम का निर्माण करने और मलई ब्रज परियोजना को पूरा करने की मबग करता है।
13. भोजपुरी शाहाबाद समेत राज्य व देश के एक बड़े भूभाग व आबादी की भाषा है लेकिन लगातार मांग किये जाने के बावजूद इसे संविधान की सातवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लगातार ठुकराया जाता रहा है। समागम जोरदार शब्दों में यह मांग करता है कि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
14. समागम एक न्यायपूर्ण नया बिहार बनाने के संकल्प और जनमुद्दों व जनांदोलनों की आवाज की आवाज को और बुलंद बनाने की भावना के साथ आगामी 9 मार्च को पटना के गांधी मैदान में आयोजित हो रहे ‘बदलो बिहार महजुटान को सफल बनाने का आह्वान करता है।

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