
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 3 अगस्त।आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने लोकसभा में बिहार से होने वाले अंतर-राज्यीय श्रमिक पलायन, प्रवासी श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा तथा राज्य में रोजगार सृजन के संबंध में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। इसके उत्तर में केंद्र सरकार ने बताया कि 28 जुलाई 2026 तक बिहार के 3.24 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक, जिनमें प्रवासी श्रमिक भी शामिल हैं, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि ई-श्रम के माध्यम से असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ उपलब्ध कराने के लिए 15 केंद्रीय योजनाओं को जोड़ा गया है। साथ ही राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल के जरिए रोजगार, कौशल विकास, करियर परामर्श और रोजगार मेलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि बिहार से करोड़ों लोगों का रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाना राज्य में रोजगार के सीमित अवसरों की गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि केवल पोर्टलों पर पंजीकरण या योजनाओं की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि बिहार में उद्योग, कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों, लघु एवं मध्यम उद्योगों तथा सार्वजनिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं, ताकि युवाओं और श्रमिकों को रोज़गार के लिए अपने घर-परिवार से दूर न जाना पड़े।
उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं, इसलिए उनके सामाजिक सुरक्षा अधिकारों, स्वास्थ्य, बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र श्रमिक तक प्रभावी ढंग से पहुँचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मांग किया कि बिहार के लिए विशेष रोजगार पैकेज, औद्योगिक निवेश और श्रम-प्रधान उद्योगों की स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे मजबूरी का पलायन रुके और राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध हो सके।
उक्त जानकारी सांसद के निजी सहायक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिया।
